



दिल्ली की पटियाला हाउस कॉमर्शियल कोर्ट-2 ने इंडिया गेट के पास स्थित राजस्थान सरकार की संपत्ति बीकानेर हाउस को कुर्क करने के आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश राज्य सरकार की ओर से दायर रिकॉल एप्लीकेशन पर सुनवाई के बाद पारित किया गया।
डिक्री होल्डर मैसर्स एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स प्राइवेटलिमिटेड ने बीकानेर हाउस को कुर्क करने का दावा पेश किया था। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने अदालत में दलील दी कि बीकानेर हाउस राज्य सरकार की संपत्ति है और इसका मामला नोखा नगरपालिका से संबंधित नहीं है।
सीपीसी की धारा 60 के तहत छूट:सरकार ने तर्क दिया कि बीकानेर हाउस सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 60 के तहत कुर्की से मुक्त है। यह संपत्ति सरकारी और सार्वजनिक कार्यों के लिए आरक्षित है।
सरकारी कार्यों में बाधा:बीकानेर हाउस में राजस्थान के मुख्यमंत्री कार्यालय, राजस्थान हाईकोर्ट रजिस्ट्री और अतिरिक्त महाधिवक्ता सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित होते हैं। कुर्की से प्रशासनिक और सार्वजनिक कार्यों में गंभीर बाधा उत्पन्न हो सकती है।
शपथ पत्र में गलत दावा: सरकार ने अदालत में बीकानेर हाउस के स्वामित्व से संबंधित सरकारी रिकॉर्ड पेश किए। डिक्री होल्डर ने शपथ पत्र में संपत्ति का गलत दावा किया है।
एकतरफा आदेश: सरकार ने दलील दी कि कोर्ट का कुर्की का आदेश एकतरफा था, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है।
अदालत का निर्णय: पटियाला हाउस कोर्ट ने सरकार की दलीलों को स्वीकार करते हुए कुर्की आदेश पर रोक लगा दी। मामले की आगे की सुनवाई में सरकार और डिक्री होल्डर को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा।बीकानेर हाउस राजस्थान सरकार की महत्वपूर्ण संपत्ति है। यह दिल्ली में राजस्थान के प्रशासनिक और सार्वजनिक कार्यों का केंद्र है। किसी भी तरह की कुर्की इस संपत्ति के संचालन को बाधित कर सकती है।