



सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को फिजिकल पेपर बैलेट वोटिंग प्रणाली को पुनः शुरू करने की मांग करने वाली जनहित याचिका को खारिज कर दिया। यह याचिका केए पॉल द्वारा दाखिल की गई थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए फिजिकल बैलेट का समर्थन किया गया था।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने सुनवाई के दौरान याचिका खारिज करते हुए कहा, "जब नेता हारते हैं, तो वे ईवीएम पर सवाल उठाते हैं, लेकिन जब जीतते हैं, तो चुप रहते हैं। यह न्यायालय ऐसे मुद्दों पर बहस के लिए सही मंच नहीं है।"
याचिकाकर्ता केए पॉल ने तर्क दिया कि:ईवीएम से छेड़छाड़ संभव है।अमेरिका और अन्य देशों की तरह भारत में भी फिजिकल बैलेट सिस्टम अपनाया जाना चाहिए। एलन मस्क और अन्य प्रमुख हस्तियों ने भी ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठाए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ईवीएम से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और प्रासंगिक संस्थानों में उठाया जाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी याचिकाएं न्यायालय के समय का दुरुपयोग हैं।
पॉल ने दावा किया कि भारतीय राजनीति में चंद्रबाबू नायडू और वाईएस जगन मोहन रेड्डी जैसे नेताओं ने भी ईवीएम से छेड़छाड़ पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, कोर्ट ने इसे चुनाव हारने पर व्यक्त की गई व्यक्तिगत असंतोष की श्रेणी में रखा।