राजस्थान में टोल वसूली को पारदर्शी और कुशल बनाने के लिए राज्य के 172 टोल प्लाजा पर फास्टैग सुविधा शुरू कर दी गई है। राज्य में कुल 180 टोल प्लाजा हैं, जिनमें से 8 टोल प्लाजा पर यह सुविधा अगले एक सप्ताह में सक्रिय कर दी जाएगी। इस पहल का उद्देश्य समय और ईंधन की बचत, पारदर्शी राजस्व संग्रह और यातायात के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करना है।
प्रमुख लाभ:
समय और ईंधन की बचत:फास्टैग सुविधा से वाहनों को टोल प्लाजा पर रुकने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
पारदर्शिता में वृद्धि:फास्टैगके माध्यम से वाहन चालकों को निर्धारित टोल दरों का भुगतान करना होगा, जिससे अवैध वसूली पर रोक लगेगी।
प्रदूषण में कमी:तेज़ गति से टोल बूथ से गुजरने की सुविधा प्रदूषण स्तर को कम करने में मदद करेगी।
महत्वपूर्ण आँकड़े:आरएसआरडीसी द्वारा संचालित 107 टोल प्लाजा में से 103 पर सुविधा चालू। राजस्थान राज्य सड़क प्राधिकरण के 40 में से 36 टोल पर फास्टैग सक्रिय। रिडकोर के सभी 31 टोल प्लाजा पर यह सुविधा पहले से ही चालू है। सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा संचालित 2 टोल पर भी फास्टैग लागू।
मानव संसाधन ठेकेदारी का समाधान: प्रमुख शासन सचिव प्रवीण गुप्ता ने बताया कि कुछ टोल ऑपरेटरों द्वारा फास्टैग का उपयोग करने में रुचि न दिखाने और सिस्टम को निष्क्रिय करने की शिकायतें सामने आई हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए मानव संसाधन ठेकेदारी की शुरुआत की गई है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करेगी कि टोल प्लाजा पर सटीक ट्रैकिंग और सही राजस्व संग्रह हो।
राजस्व में वृद्धि: फास्टैग के जरिए टोल वसूली पूरी तरह डिजिटल होने से राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। एक टोल प्लाजा पर परीक्षण के दौरान राजस्व में आश्चर्यजनक वृद्धि देखी गई, जिससे स्पष्ट हुआ कि स्वचालित और पारदर्शी प्रणाली की आवश्यकता कितनी महत्वपूर्ण है।
फास्टैग का भविष्य:राज्य सरकार का लक्ष्य सभी टोल प्लाजा को स्वचालित और पारदर्शी बनाना है। इसके जरिए टोल प्लाजा की नीलामी प्रक्रिया को अधिक प्रतिस्पर्धात्मक और निष्पक्ष बनाया जाएगा।