



कनाडा में हिंदू मंदिरों और हिंदुओं पर खालिस्तानियों के हमले के बाद राजस्थान सिख समाज ने एक कड़ा संदेश देते हुए इन हमलों की कड़ी निंदा की है। राजस्थान सिख समाज के अध्यक्ष सरदार अजय पाल सिंह की अगुवाई में मंगलवार को जयपुर के राजा पार्क स्थित गुरुद्वारे में एक आपात बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में सिख समाज के विभिन्न गुरुद्वारों की प्रबंधक कमेटियों, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के करीब 100 से अधिक प्रबुद्ध सदस्यों ने भाग लिया और कनाडा में हो रहे इस प्रकार के हमलों की निंदा की।
राजस्थान सिख समाज के अध्यक्ष सरदार अजय पाल सिंह ने कहा कि सिख समाज का इतिहास हिंदू धर्म और उसके मंदिरों की रक्षा में बलिदानों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि सिख समाज कभी भी हिंदू विरोधी नहीं हो सकता, क्योंकि हमारे गुरुओं ने हिंदू समाज के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सिख समाज हमेशा से सभी हिंदू देवी-देवताओं का सम्मान और पूजा करता आया है, और कनाडा में मंदिरों पर हुए हमले उनके लिए भी एक गहरी चोट के समान हैं।
राजस्थान सिख समाज के अध्यक्ष सरदार अजय पाल सिंह ने कहा कि कनाडा में खालिस्तानी तत्वों द्वारा हिंदू मंदिरों पर हमले सिख और हिंदू समाज के बीच वैमनस्य फैलाने का प्रयास हैं, लेकिन सिख समाज इस तरह के कृत्यों का समर्थन नहीं करता है। उन्होंने कहा कि सिख धर्म का मूल सिद्धांत मानवता और सेवा पर आधारित है, और किसी भी धर्म के अनुयायियों के प्रति हिंसा का कोई स्थान नहीं है। सिख समुदाय हमेशा से हिंदू-सिख एकता का समर्थक रहा है, और ऐसे हमलों का विरोध करता है जो किसी भी समाज में अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं।
इस बैठक में उपस्थित सभी सिख समाज के नेताओं और प्रबंधक कमेटियों के सदस्यों ने एकमत होकर कनाडा में हिंदू मंदिरों पर हुए हमलों की निंदा की और इस प्रकार की हिंसक गतिविधियों को समाप्त करने की मांग की। उन्होंने भारतीय और कनाडाई सरकार से आग्रह किया कि इस मामले में उचित कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
यह बैठक हिंदू और सिख समाज के बीच एकता और सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए आयोजित की गई थी। बैठक में शामिल सभी ने संकल्प लिया कि वे हिंदू-सिख संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे और किसी भी प्रकार की हिंसा या धार्मिक हमले का विरोध करेंगे।
राजस्थान सिख समाज ने इस मुद्दे पर अपनी गंभीरता जाहिर करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार की एकजुटता बनाए रखने का संकल्प लिया, ताकि किसी भी प्रकार की विभाजनकारी गतिविधियों को बढ़ावा न मिले।