



जयपुर की दी बार एसोसिएशन ने वकालतनामे पर लगने वाले बीसीआर और बार एसोसिएशन के टिकटों में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया। फरवरी 2024 में इस फर्जीवाड़े के मामले के बाद, बार पदाधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए 5 अप्रैल 2024 से वकालतनामे को कैशलेस और ऑनलाइन बना दिया। नई व्यवस्था के तहत अब टिकटों का पैसा सीधा एसोसिएशन के खाते में जमा होने लगा है, जिससे फर्जीवाड़ा रुकने के साथ-साथ एसोसिएशन की वित्तीय स्थिरता भी बढ़ी है।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष पवन शर्मा ने बताया कि इस व्यवस्था से पिछले 6 महीने में बार के खाते में 1 करोड़ रुपए जमा हुए हैं। एसओजी जांच में पता चला कि बार कर्मचारियों और पूर्व पदाधिकारियों ने लगभग 3.43 करोड़ रुपए का गबन किया था, जिसके बाद बार ने यह कदम उठाया। अब, वकालतनामे पर टिकट बार एसोसिएशन खुद ही लगाता है और सभी पेमेंट ऑनलाइन या बैंक के जरिए ही स्वीकार किए जाते हैं।
महासचिव राजकुमार शर्मा और कोषाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह नरूका ने बताया कि वकालतनामे के टिकट से जमा हुए पैसे से 75 लाख रुपए की एफडी कराई गई है और 10 अधिवक्ता के डेथ क्लेम मामलों में 25 लाख रुपए उनके आश्रितों को दिए गए हैं।