



राजस्थान में हो रहे उपचुनाव में परिवारवाद की छाप स्पष्ट दिखाई दे रही है। सात सीटों में से पांच सीटों पर दिग्गज नेताओं के परिजनों को टिकट दिया है। इनमें दो दिग्गज नेताओं की पत्नियाँ, एक का भाई, और दो नेताओं के बेटे शामिल हैं। शेखावाटी का ओला परिवार, जो अब तक 18 चुनाव जीत चुका है, इस बार अपनी तीसरी पीढ़ी को मैदान में उतार रहा है। खींवसर सीट पर (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी)रालोपा प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने अपने भाई के बाद अब अपनी पत्नी कनिका बेनीवाल को चुनावी मैदान में उतारा है।
भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने परिवारवाद पर तीखा बयान देते हुए कहा कि भाजपा में टिकट वितरण केंद्रीय नेतृत्व और जनता की राय के आधार पर होता है। भाजपा नेता ज्योति मिर्धा ने हनुमान बेनीवाल पर तंज कसते हुए कहा, "पहली बार बाई, फिर भाई और अब लुगाई"। दूसरी ओर कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा ने नाराजगी जताई है और आरोप लगाया कि उनके भाई सांसद हरीश मीणा ने ही देवली-उनियारा सीट से उनका टिकट कटवाया है।
वर्तमान में राजस्थान विधानसभा में 27 से अधिक विधायक किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े हुए हैं। इनमें पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, बृजेंद्र ओला, दिया कुमारी, और अन्य प्रमुख नेताओं के परिवार के सदस्य भी शामिल हैं। इन नेताओं ने परिवार के प्रभाव के चलते उपचुनाव में मजबूत दावेदारी पेश की है, जिससे मुकाबला रोचक हो गया है।