



टोंक जिले की देवली -उनियारा विधानसभा क्षैत्र से लगातार दो बार कांगेस से विधायक निर्वाचित हुए हरिश चन्द्र मीणा के सांसद चुने जाने के बाद अब इस सीट के लिए 13 नवम्बर को उपचुनाव होना है। इस सीट से उपचुनाव में दोंनो ही प्रमुख पार्टियों भाजपा व कांग्रेस ने इस बार भी जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए टिकट दिए है।
विधानसभा के परिसीमन के अस्तित्व में आयी देवली- उनियारा विधानसभा सीट के लिए अब चार आम चुनाव तथा अब 13 नवम्बर को होने वाले उपचुनाव में भी यही परंपरा कायम रखी है। यहां से भाजपा ने पूर्व विधायक राजेन्द्र गुर्जर को आपना प्रत्याशी बनाया है वहीं कांग्रेस ने स्थानीय नए उम्मीदवार कस्तूर चंद मीणा को टिकट दिया है। वही कांग्रेस के टिकट नही मिलने के कारण कांग्रेस के महासचिव सचिन पायलट गुट के नरेश मीणा ने भी अपना निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दखिल करके कांग्रेस की मुश्किलें बढा दी है। आगामी 13 नवम्बर को 3 लाख 2 हजार 721 मतदाता नए विधायक का चुनाव मताधिकार से करेंगे जिसमें 1 लाख 46 हजार 766 महिलाए मतदाता शामिल है।
देवली उनियारा विधानसभा क्षेत्र परिसीमन में सामान्य है लेकिन दोनों प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों कांग्रेस एवं भाजपा ने जातीय समीकरणों में अपनी जीत को ढूंढने की कोशिश करते हुए को वर्ष 2008 के विधानसभा आमचुनाव से ही हमेशा दो ही जातियों से प्रत्याशी खडे किए है। वर्ष 2008 में कांग्रेस के रामनारायण मीणा ने भाजपा के नाथू सिंह गुर्जर को हराया जिसके बाद 2013 में भाजपा के नए चेहरे राजेंद्र गुर्जर को टिकट दिया जिन्होंने कांग्रेस के रामनारायण मीणा को पटखनी दे दी। लेकिन वर्ष 2018 में संपन्न चुनाव में भाजपा ने वापस राजेंद्र गुर्जर को चुनाव लडाया ,वहीं कांग्रेस ने भाजपा छोड़ करके कांग्रेस में आए सांसद हरीश चंद्र मीना को प्रत्याशी बनाया तथा यह सीट भाजपा से छीन ली। मीना ने ही लगातार दूसरी बार भी वर्ष 2023 के आमचुनाव में राजेन्द्र गुर्जर का टिकट काट करके भाजपा की ओर से नए प्रत्याशी विजय बैंसला को हराकर अपना दबदबा कायम रखा लेकिन पार्टी ने छह माह बाद इस वर्ष हुए लोकसभा चुनाव में टोंक- सवाई माधोपुर क्षेत्र से चुनाव लड़ाकर बड़ा दांव खेला जिसमें विधायक मीना ने दो बार के सांसद सुखबीर सिंह जौनापुरिया को हराकर अपनी जीत दर्ज की। विधायक हरिश चन्द्र मीना सांसद चुनने के बाद उनके विधायक पद से इस्तीफा देने से देवली -उनियारा सीट रिक्त हो गई। जिसके लिए निर्वाचन आयोग ने 13 नवम्बर को मतदान कराए जाने की घोषणा करते हएु चुनाव कार्यक्रम घोषित किया है।
जिले की देवली- उनियारा विधानसभा सीट से दोनों ही प्रमुख पार्टियों में प्रत्याशियों की लंबी लिस्ट होने के बावजूद कोई जोखिम नही ली बल्कि पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए भाजपा ने गुर्जर तो कांग्रेस ने मीणा प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारा है। भाजपा में टिकट नही मिलने से नाराज विजय बैसला ने बगावत की कोशिश को तही लेकिन पार्टी के शीर्ष नेताओ से बातचीत के बाद अपना नामांकन नही किया लेकिन कांग्रेस से नाराज नरेश मीणा ने कस्तूर चन्द्र मीणा को टिकट मिलने के बाद एक बार तो चुनाव नही लडने की घोषणा कर दी थी लेकिन अगले ही दिन यू टर्न लेते हुए अपने समर्थकों के साथ उनियारा पहुंच करके निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल किए जाने से कांग्रेस की मुश्किलें बढ गई है क्योंकि नरेश मीना की सोशल मीडिया में एक पोस्टर जिसके बैक सपोर्ट के रूप में रविंद्र सिंह भाटी, हनुमान बेनीवाल, चंद्रशेखर आजाद और राजकुमार रोत को दिखाया गया है जिससे कांग्रेस की चिंता बढ जाना स्वाभाविक है।
जिले के देवली- उनियारा विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव के नामंाकन प़त्रों की सोमवार को जांच की जाएगी साथ ही 30 अक्टूबर को नाम वापसी वापस लिए जा सकेंगे। अब दोनो ही दल कांग्रेस एवं भाजपा जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश करते हुए अपने समर्थन में प्रत्याशियों को नाम वापसी कराए जाने में लगे हुए है। आखिर देवली- उनियारा विधानसभा उपचुनाव में कितने प्रत्याशी ताल ठोंकेगे यह तो नाम वापसी के बाद ही पता चल सकेंगा।