



हाईकोर्ट ने गंगापुर सिटी, सवाईमाधोपुर में दर्ज एक धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र के मामले में वरिष्ठ पुलिस अफसर की भूमिका पर सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने इस मामले में तत्कालीन एडिशनल एसपी सुरेश खींची द्वारा बिना जांच अधिकारी (आईओ) की भूमिका निभाए वर्दी में नोटों के ढेर के साथ मध्यस्थता करने को अनुचित माना है।
कोर्ट का कहना है कि यह पुलिस अधिकारी का व्यक्तिगत कर्तव्य नहीं हो सकता। न्यायमूर्ति उमाशंकर व्यास ने आरोपी पवन कुमार की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए डीजीपी से इस प्रकरण में उचित समझे तो मामले की पुन: जांच कराने के निर्देश दिए हैं, अन्यथा पूर्व की रिपोर्ट को खींची की सेवा पुस्तिका में लगाने का आदेश दिया है।
अधिवक्ता रविन्द्र सिंह शेखावत ने बताया कि अदालत को पहले सूचित किया गया था कि परिवादी पक्ष ने राजीनामे के तौर पर 34 लाख रुपये तत्कालीन एएसपी खींची की मौजूदगी में दिए थे, जबकि वे मामले के आईओ नहीं थे। इस पर अदालत ने एएसपी को शपथ पत्र सहित तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करने को कहा था। एडीजी, जयपुर ऑफिस के एसआई संतराम ने रिपोर्ट में बताया कि खींची मेघालय में प्रशिक्षण पर हैं और उस समय वे परिवादी पक्ष से व्यक्तिगत परिचय के आधार पर मध्यस्थता कर रहे थे। डीजीपी ऑफिस के पत्र में भी यही कहा गया कि खींची ने पदीय अधिकारों का दुरुपयोग नहीं किया।
गौरतलब है कि यह मामला एक स्कूल संचालक द्वारा 2022 में स्कूल लेखाकार पर गबन का आरोप लगाए जाने के बाद शुरू हुआ था। पुलिस ने आरोपी को जून 2024 में गिरफ्तार किया था, लेकिन इस दौरान खींची द्वारा कथित मध्यस्थता पर कोर्ट का ध्यान आकर्षित हुआ, जिससे यह मामला और पेचीदा हो गया है।