Saturday, 29 August 2026

रिलायंस और एनविडिया का करार: भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए साझेदारी


रिलायंस और एनविडिया का करार: भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए साझेदारी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में नया अध्याय जोड़ते हुए एनविडिया के फाउंडर और सीईओ जेनसेंग हुआंग और रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने भारत में एआई इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए करार किया है। इस साझेदारी की घोषणा दोनों दिग्गजों ने मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित ‘एनविडिया समिट इंडिया’ में की। यह सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है, जिसमें टेक्नोलॉजी के उभरते आयामों पर चर्चा हो रही है।

मुकेश अंबानी ने कहा कि रिलायंस जियो अब दुनिया की सबसे बड़ी डेटा कंपनी बन चुकी है और इस करार से भारत में एआई को सुलभ और किफायती बनाना उनका लक्ष्य है। अंबानी के अनुसार, “हमारे लिए यह जरूरी है कि हर भारतीय तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फायदा पहुँचे और इसे किफायती दामों में उपलब्ध कराना हमारी जिम्मेदारी है।” उन्होंने यह भी कहा कि एआई का उपयोग हर भारतीय अपने फोन और कंप्यूटर पर कर सके, यह सुनिश्चित करना रिलायंस का मिशन है।

जेनसेंग हुआंग ने भी इस साझेदारी को ऐतिहासिक बताते हुए भारत की तकनीकी क्षमता की सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत में कंप्यूटर साइंस और आईटी के क्षेत्र में प्रशिक्षित व्यक्तियों की विशाल संख्या और इसके साथ ही तेजी से डिजिटल विकास, एआई के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर अग्रणी बना सकता है।

भारत को एआई के वैश्विक केंद्र के रूप में देख रहे अंबानी और हुआंग: मुकेश अंबानी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल समाज की कल्पना और भारत की युवाशक्ति को एआई के विस्तार में एक अहम कारक बताया। उन्होंने कहा, “एआई एक ज्ञानक्रांति है जिससे वैश्विक समृद्धि का रास्ता खुलेगा, और भारत के पास इसके लिए सही समय, स्थान, और संसाधन हैं।”

अंबानी ने बताया कि जियो विश्व स्तर पर सबसे बड़ी डेटा कंपनी के रूप में उभरी है, जो भारत में 15 सेंट प्रति जीबी की दर पर डेटा उपलब्ध कराती है, जबकि अमेरिका में यह दर पाँच डॉलर प्रति जीबी है। उन्होंने कहा कि जैसे जियो ने डेटा में क्रांति लाई, वैसा ही अब एआई में लाने का समय है।

साझेदारी का प्रभाव और लक्ष्य: एनविडिया के जेनसेंग हुआंग ने भारत के आईटी और तकनीकी उद्योग में निवेश और विकास की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि यह करार भारत को डीप टेक्नोलॉजी और एआई के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। उनका कहना था, “यह एक असाधारण समय है, जहां भारत के पास बड़ी संख्या में प्रशिक्षित इंजीनियर और एक विशाल जनसंख्या है। मैं इस साझेदारी के लिए मुकेश अंबानी के साथ काम करने को लेकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।”

इस साझेदारी के माध्यम से दोनों कंपनियाँ एक ऐसा आधारभूत ढांचा तैयार करना चाहती हैं जिससे एआई का फायदा न केवल बड़े उद्योगों को, बल्कि छोटे व्यवसायों और आम जनता तक भी पहुँचे।

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