



राजस्थान में राइजिंग राजस्थान समिट-2024 के तहत कृषि में निवेश और मशीनीकरण पर जोर दिया गया है। राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष सीआर चौधरी ने गुरुवार को कहा कि कृषि में निवेश से राज्य की उत्पादकता बढ़ेगी और मशीनीकरण से किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि राज्य सरसों, ज्वार और तिलहन के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है।
इस प्री-समिट बैठक में विभिन्न विशेषज्ञों, किसानों, उद्यमियों और नीति निर्धारकों ने भाग लिया। बैठक में कृषि से संबंधित क्षेत्रों में निवेश के 19,497 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। मुख्य सचिव सुधांश पंत ने प्रधानमंत्री के 'प्रति बूंद अधिक फसल' मिशन पर बल देते हुए कहा कि यह पहल राज्य के लिए अत्यधिक उपयोगी साबित होगी।
कृषि नवाचार और डिजिटल खेती के लाभों पर भी चर्चा हुई। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव, डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने किसानों को कृषि उद्यमी के रूप में देखने की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि फसल विविधीकरण और प्राकृतिक खेती से लागत में कमी लाई जा सकती है।
समिट में 350 से अधिक निवेशकों और वक्ताओं ने हिस्सा लिया, जिसमें किसानों की आय दोगुनी करने और कृषि में तकनीकी नवाचार पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। समिट का आयोजन 9-11 दिसंबर 2024 को जयपुर में होगा, जिसमें राज्य सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, और रीको का सहयोग रहेगा।

शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी राजन विशाल ने राज्य की कृषि रणनीति में “4 पी“ - ’प्रोडक्टिविटी’, ’प्रोक्योरमेंट’, ’प्रोसेसिंग’ और ’पोपुलराइजेशन’ - पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करने के लिए प्रौद्योगिकीय उन्नति और नवीन समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उनकी आजीविका को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें स्थायी एवं टिकाउ प्रथाओं को अपनाने के लिए सशक्त बनाने पर भी जोर दिया। विशाल ने प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और किसानों को आवश्यक सहायता प्रदान करने में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (ईओडीबी) फ्रेमवर्क, सिंगल विंडो सिस्टम, किसान साथी सेवा पोर्टल और किसान सुविधा ऐप जैसे प्लेटफार्मों की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जो किसानों को सशक्त बनाने में मदद कर रहे हैं। प्रमुख शासन सचिव पशुपालन एवं डेयरी डॉ. समित शर्मा ने उद्यमियों को डेयरी और पशुपालन से प्राप्त होने वाले उप-उत्पादों, जैसे गोबर और गोमूत्र की क्षमता का दोहन करने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इन क्षेत्रों में निवेश करने से नवाचार, आर्थिक विकास और रोजगार सृजन के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध होंगे, साथ ही इस क्षेत्र में सस्टेनेबल प्रैक्टेसिस में भी योगदान मिलेगा। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, चेयरमैन, डॉ. मीनेश शाह ने उद्योग से जुड़ी अंतर्दृष्टि साझा कीं। वहीं, जयपुर के प्रगतिशील किसान सुरेंद्र अवाना, कृषि क्षेत्र में पद्मश्री पुरूस्कार से सम्मानित प्रगतिशील कृषक सुण्डाराम वर्मा सहित अन्य प्रगतिशील कृषकों ने कृषि नवाचार और जैविक खेती के बारे में अपने अनुभव और उपलब्धियों के बारे में बताया। साथ ही प्री समिट में उन्नत व जैविक कृषिं के बारे में सफलता की कहानियों व जीवन उदाहरणों द्वारा भी बताया गया। प्री समिट में 350 निवेशकों और वक्ताओं ने हिस्सा लिया। उद्घाटन सत्र के बाद दो प्लैनेरी सेशंस का भी आयोजन हुआ। पहला सेशन ‘‘किसानों की आय दोगुनी करने हेतु कृषि के सम्बद्ध क्षेत्रों एवं खाद्यान्न प्रसंस्करणों को बढ़ावा देना‘‘ विषय पर हुआ। वहीं, दूसरा प्लैनेरी सेशन कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में तकनीकी नवाचार एवं डिजिटल ट्रांस्फोर्मेशन विषय पर आयोजित हुआ।