



नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया, जिससे वे इस केंद्र शासित प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री बने। यह समारोह श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर (SKICC) में आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में नेता और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ, जिसमें डिप्टी सीएम सुरेंदर चौधरी और अन्य मंत्रियों ने शपथ ली। नौशेरा से विधायक सुरेंदर चौधरी ने डिप्टी सीएम का पद संभाला। उन्होंने विधानसभा चुनाव में राज्य भाजपा के अध्यक्ष रवींद्र रैना को 7819 वोट से हराया था।
सरकार में अन्य प्रमुख मंत्रियों में डीएस पोरा से विधायक सकीना इट्टू शामिल हैं, जो जम्मू-कश्मीर की सबसे युवा विधायक बनकर 1996 में 26 वर्ष की आयु में विधानसभा पहुंची थीं। मेंढर से विधायक जावेद राणा, जो 2002 और 2014 में इसी सीट से चुने गए थे, पहली बार मंत्री बने हैं। इसके अलावा, राफियाबाद से पहली बार विधायक बने जावेद अहमद डार और छंब सीट से निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा भी मंत्रिमंडल में शामिल हुए। सतीश शर्मा ने शपथ के बाद “जय माता दी” का नारा लगाया, जिससे जनता में उत्साह का माहौल बन गया।

शपथ ग्रहण समारोह में I.N.D.I.A. ब्लॉक के प्रमुख नेताओं सहित 50 से अधिक वीआईपी मेहमान शामिल हुए। संसद में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, कांग्रेस प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे, तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, उद्धव ठाकरे, शरद पवार, लालू प्रसाद यादव और अन्य प्रमुख नेता इस समारोह में उपस्थित थे। हालांकि, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी समारोह में नहीं पहुंचे। कांग्रेस ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा नहीं मिलता। उमर अब्दुल्ला ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार से जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता क्षेत्र के विकास और लोगों के कल्याण के लिए काम करना है। इस ऐतिहासिक क्षण में उमर ने जम्मू-कश्मीर के भविष्य को और मजबूत करने का संकल्प लिया।