



जयपुर हेरिटेज नगर निगम की पूर्व महापौर मुनेश गुर्जर के खिलाफ पब्लिक अगेंस्ट करप्शन संस्था के अध्यक्ष कमलेश सक्सेना एडवोकेट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत शिकायत दर्ज कराई है। सक्सेना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, निदेशक प्रवर्तन निदेशालय और संयुक्त निदेशक को लिखे गए परिवाद में मुनेश गुर्जर और उनके पति पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवाद के अनुसार, 5 अगस्त 2023 को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) ने मुनेश गुर्जर के निवास पर तलाशी अभियान चलाया था, जिसमें उनके घर से 41,55,500 रुपये की नगद राशि बरामद हुई थी। जब्त की गई राशि का संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में मुनेश गुर्जर और उनके पति असमर्थ रहे। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि मुनेश गुर्जर ने भूमि के पट्टे जारी करने के बदले रिश्वत ली, जिसमें उनके पति और अन्य दलालों की भूमिका रही।
शिकायतकर्ता के अनुसार, महापौर और उनके दलालों पर जमीन के पट्टे जारी करने के एवज में रिश्वत लेने का आरोप है। एसीबी ने पहले से ही इस मामले में कुछ कर्मचारियों और दलालों को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से रिश्वत में प्राप्त राशि भी बरामद हुई थी। इस सिलसिले में एसीबी ने एफआईआर संख्या 213/2023 के तहत मामला दर्ज किया और 6 सितंबर 2024 को निदेशक डीएलबी द्वारा अभियोजन स्वीकृति मिलने के बाद 19 सितंबर 2024 को एसीबी न्यायालय में महापौर, उनके पति और अन्य तीन के खिलाफ चार्जशीट दायर की गई।
शिकायतकर्ता के अनुसार, गुर्जर ने 7500 पट्टे जारी किए थे और आरोप है कि इसके लिए प्रत्येक पट्टे पर एक लाख से 10 लाख रुपये तक की राशि रिश्वत के रूप में ली गई। इसलिए, धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत ईडी को जांच करने की मांग की गई है। इस जांच में पूर्व महापौर की अवैध संपत्तियों के बारे में खुलासा होने की संभावना है।

