



राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के पूर्व सरकार्यवाह सुरेश भैय्याजी जोशी ने जयपुर में विजयदशमी उत्सव में जातिगत भेदभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जन्म के आधार पर समाज में जातियों का निर्धारण नहीं होना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या हमारे धार्मिक स्थलों और परंपराओं का संबंध किसी एक जाति से है? भैय्याजी जोशी ने उदाहरण देते हुए कहा, "क्या कोई कह सकता है कि हरिद्वार या हमारे 12 ज्योतिर्लिंग, या 51 शक्तिपीठ किसी जाति के हैं?" उनका कहना था कि भारत के हर कोने में रहने वाला हिंदू इन धार्मिक स्थलों को अपना मानता है, तो फिर विभाजन और भेदभाव कहां से आ रहे हैं?
भैय्याजी जोशी ने जोर देकर कहा कि जन्म के आधार पर बनी धारणा को खत्म करते हुए हमें सभी को एक समाज के अंग के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने कहा कि सीमाएं, राज्य की हों या जातिगत, समाज में विभाजन पैदा नहीं कर सकतीं और अगर कोई गलत धारणा है तो उसे बदला जाना चाहिए।
भारत को बाजार के रूप में देखने की आलोचना
देश की आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए भैय्याजी जोशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "लोकल के लिए वोकल" अभियान का समर्थन किया और कहा कि भारत को केवल बाजार के रूप में देखे जाने के बजाय अपने पैरों पर खड़ा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ लोगों का देश भारत अपनी पहचान को बनाए रखते हुए बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर निर्भरता कम करे।