



1. चैत्र (मार्च-अप्रैल)
इस महीने में चना और नीम की कोमल पत्तियों का सेवन करें। चना रक्त शुद्ध करता है, और नीम की पत्तियां शरीर के दोषों को दूर करने में सहायक होती हैं।
2. वैशाख (अप्रैल-मई)
गर्मी के शुरुआत के लिए बेल का सेवन करें। तेल का सेवन पूरी तरह से त्यागें, क्योंकि यह स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।
3. ज्येष्ठ (मई-जून)
गर्मी चरम पर होती है, इसलिए दिन में सोना, ठंडी छाछ, लस्सी, ज्यूस और अधिक पानी पिएं। गरिष्ठ और गर्म भोजन का सेवन न करें।
4. आषाढ़ (जून-जुलाई)
इस महीने में आम, पुराने गेहूं, सत्तु, जौ, भात, खीर, ठंडे पदार्थ जैसे ककड़ी, पलवल, करेला का सेवन करें। गर्म प्रकृति की चीजों से बचें।
5. श्रावण (जुलाई-अगस्त)
श्रावण में हरड़ का सेवन करें, हरी सब्जियों और दूध का त्याग करें। हल्के सुपाच्य भोजन जैसे पुराने चावल, गेहूं, खिचड़ी, दही का सेवन करें।
6. भाद्रपद (अगस्त-सितंबर)
बारिश के मौसम में पाचन शक्ति कम होती है, इसलिए हल्का और सुपाच्य भोजन खाएं।
7. आश्विन (सितंबर-अक्टूबर)
इस महीने में जठराग्नि तेज होती है, इसलिए दूध, घी, गुड़, नारियल, मुनक्का, गोभी का सेवन कर सकते हैं। ये गरिष्ठ भोजन इस मौसम में पच सकते हैं।
8. कार्तिक (अक्टूबर-नवंबर)
गर्म दूध, गुड़, घी, शक्कर, मूली का सेवन करें। ठंडे पेय जैसे छाछ, लस्सी, ठंडा दही और फ्रूट ज्यूस से बचें।
9. अगहन (नवंबर-दिसंबर)
इस महीने में अत्यधिक ठंडी और गर्म चीजों का सेवन न करें।
10. पौष (दिसंबर-जनवरी)
ठंड के मौसम में दूध, खोया, गौंद के लड्डू, गुड़, तिल, घी, आलू, आंवला का सेवन करें।
11. माघ (जनवरी-फरवरी)
घी, नए अनाज, गौंद के लड्डू जैसे गरिष्ठ भोजन का सेवन करें, जो शरीर को उर्जा देते हैं।
12. फाल्गुन (फरवरी-मार्च)
गुड़ का सेवन करें और सुबह योग व स्नान को दिनचर्या में शामिल करें। इस महीने में चने से बचें।
नोट: आयुर्वेद के अनुसार दिए गए आहार सुझाव हमारे शरीर की ऋतुओं के अनुकूल पाचन और स्वास्थ्य को बनाए रखने में सहायक होते हैं।