Saturday, 29 August 2026

जयपुर में आठ दिवसीय जनजातीय उत्सव "आदि बाजार" का भव्य उद्घाटन, ग्रेटर नगर निगम महापौर डॉ. सोम्या गुर्जर ने किया शुभारंभ


जयपुर में आठ दिवसीय जनजातीय उत्सव "आदि बाजार" का भव्य उद्घाटन, ग्रेटर नगर निगम महापौर डॉ. सोम्या गुर्जर ने किया शुभारंभ

जनजातीय कार्य मंत्रालय के उपक्रम ट्राइफेड द्वारा 8 से 15 अक्टूबर 2024 तक जयपुर में "आदि बाजार" नामक जनजातीय उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। जयपुर ग्रेटर नगर निगम की महापौर डॉ. सोम्या गुर्जर ने मंगलवार को इस आठ दिवसीय जनजातीय उत्सव का उद्घाटन किया। इस आयोजन का उद्देश्य देशभर के जनजातीय कारीगरों द्वारा निर्मित शिल्प, कला और सांस्कृतिक उत्पादों को प्रदर्शित करना और उन्हें मुख्यधारा में लाना है।

उद्घाटन समारोह में महापौर डॉ. सोम्या गुर्जर ने कहा कि जनजातीय कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पाद भारतीय संस्कृति को जीवंत रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि जनजातीय समुदायों को सशक्त बनाने और उनके उत्पादों को व्यापक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यह पहल अत्यंत सराहनीय है।

आठ दिवसीय इस "आदि बाजार" में देशभर से आए जनजातीय कारीगर अपने हस्तशिल्प, वस्त्र, आभूषण, और वन धन उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं। मेले में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और नॉर्थ ईस्ट के शिल्पकार भाग ले रहे हैं, जिनके विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनी भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को समृद्ध बना रही है।

ट्राइफेड और जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा आयोजित "आदि बाजार" का मुख्य उद्देश्य जनजातीय समाज के कारीगरों को आजीविका प्रदान करना, उनकी आय में वृद्धि करना और उनके उत्पादों के विपणन के माध्यम से उनका सामाजिक-आर्थिक विकास करना है। 8 से 15 अक्टूबर 2024 तक जयपुर के के. के. स्क्वायर मॉल में आयोजित इस मेले में देशभर के जनजातीय कारीगर अपने शिल्प और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन कर रहे हैं।

आदि बाजार में 30 जनजातीय स्टॉल लगाए गए हैं, जहां जनजातीय हस्तशिल्प, कला, पेंटिंग, वस्त्र, आभूषण और वन धन केंद्रों के ऑर्गैनिक उत्पाद उपलब्ध हैं। इस आयोजन में राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, नॉर्थ ईस्ट, और दिल्ली से आए 50 से अधिक जनजातीय कारीगर हिस्सा ले रहे हैं।

राजस्थान के बगरु प्रिंट वस्त्र, मेटल मीनाकारी आइटम, ब्लू पॉटरी, लहरिया वस्त्र और वन धन केंद्रों के ऑर्गैनिक उत्पाद यहां प्रमुख आकर्षण हैं। उत्तराखंड के लकड़ी के आइटम, मध्य प्रदेश का बाघ प्रिंट, पश्चिम बंगाल की काथा वर्क की साड़ी, छत्तीसगढ़ की डोकरा आर्ट, और टसर सिल्क की साड़ी/दुपट्टे भी यहां प्रदर्शित और बिक्री के लिए उपलब्ध हैं।

“आदि बाजार सह आदि चित्रा” ट्राइफेड की एक पहल है जो जनजातीय समुदायों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाने में सहायक है। इस प्रकार के आयोजन ट्राइफेड द्वारा समय-समय पर जनजातीय समाज के कारीगरों को समर्थन और प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से किए जाते हैं।

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