



जय क्लब में प्रोबासी बेंगाली कल्चरल सोसायटी द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव 2024 का भव्य आरंभ हो चुका है। 8 अक्टूबर को पंचमी से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 13 अक्टूबर तक चलेगा। इस आयोजन में बंगाली परंपराओं के साथ विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं, जिससे बंगाली समुदाय और स्थानीय लोग दुर्गा पूजा की पवित्रता और सांस्कृतिक समृद्धि का आनंद ले रहे हैं।
सोसायटी के मानद अध्यक्ष डॉ. एसके सरकार ने इस आयोजन को “शक्ति की भावना का उत्सव” बताते हुए कहा कि दुर्गा पूजा का यह भव्य समारोह बंगाली समाज को राष्ट्रीय सीमाओं से परे एकजुट करता है और इसे बंगाली समुदाय का सबसे प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक उत्सव माना जाता है।
उन्होंने बताया कि जय क्लब में मनाया जाने वाला यह उत्सव बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक और कलात्मक परंपराओं का जीवंत प्रदर्शन है। पंडालों की भव्यता और माँ दुर्गा की विस्तृत प्रतिमा, जो राजस्थान में सबसे ऊँची मानी जाती है, इस महोत्सव को और भी खास बनाती है। इस उत्सव में पारंपरिक बंगाली संगीत, नृत्य, और नाटकीय प्रस्तुतियों से लेकर "महालय," "संधि पूजा," और "सिंदूर खेला" जैसे अनुष्ठानों तक, विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ये अनुष्ठान जीवन, मृत्यु और पुनर्जन्म की चक्रीय प्रकृति को दर्शाते हैं और वर्तमान को ऐतिहासिक निरंतरता से जोड़ते हैं।
सोसायटी के मानद अध्यक्ष डॉ. एसके सरकार ने बताया कि पंचमी के दिन माँ दुर्गा की स्थापना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। इस दिन 'आनोंदो मेला' का आयोजन किया गया, जिसमें सोसायटी की महिलाओं ने अपने घरों से तैयार बंगाली व्यंजन के स्टॉल लगाए। इस आयोजन में डांडिया नृत्य, जादू शो और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन हुआ। शष्ठी के दिन देवी की प्रतिमा का अनावरण और आमंत्रण अधिवास के साथ धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ हुए। ढाक की ध्वनि और मंत्रोच्चार से वातावरण भक्तिमय हो गया। इस दिन देवी दुर्गा की महिषासुर मर्दिनी के रूप में विजय की कथा का मंचन भी हुआ।
आज सप्तमी के दिन, सुबह माँ दुर्गा की पूजा के बाद पुष्पांजलि अर्पित की गई। इसके बाद खेल कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया और दोपहर में भोग प्रसादी का वितरण हुआ। शाम को संध्या आरती के बाद बच्चों की विचित्र भेष-भूषा प्रतियोगिता और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महोत्सव के दौरान विभिन्न दिन पर पारंपरिक पूजा विधियों के साथ-साथ गीत, नृत्य और अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जो इस उत्सव को यादगार बना रहे हैं।