Saturday, 29 August 2026

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव: नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने 51 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया, उमर अब्दुल्ला आगे


जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव: नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन ने 51 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया, उमर अब्दुल्ला आगे

जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव के रुझानों में नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) और कांग्रेस गठबंधन ने बहुमत का आंकड़ा छू लिया है। 90 सीटों वाली विधानसभा में 46 सीटों का बहुमत आवश्यक है, और NC-कांग्रेस गठबंधन ने 51 सीटों पर बढ़त बनाते हुए बहुमत हासिल कर लिया है। भाजपा 26 सीटों पर और पीडीपी 4 सीटों पर आगे है, जबकि निर्दलीय और छोटी पार्टियां 9 सीटों पर अपनी बढ़त बनाए हुए हैं।

इस चुनाव में जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बडगाम और गांदरबल सीटों पर आगे चल रहे हैं। वहीं, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती श्रीगुफवारा-बिजबेहरा सीट से पीछे हैं। अपनी स्थिति पर टिप्पणी करते हुए इल्तिजा ने कहा कि वे लोगों के फैसले का सम्मान करती हैं।

दूसरी ओर, भाजपा अध्यक्ष रविंद्र रैना नौशेरा सीट से हार चुके हैं। इस बार जम्मू-कश्मीर में 18 सितंबर से 1 अक्टूबर तक तीन चरणों में चुनाव संपन्न हुए थे। कुल मिलाकर 63.88% वोटिंग हुई, जो 2014 के 65% की तुलना में 1.12% कम है।

जम्मू-कश्मीर की 90 विधानसभा सीटों के लिए 8 अक्टूबर मंगलवार को सुबह 8:00 बजे मतगणना शुरू हो गई है, जिसका परिणाम शाम तक आने की उम्मीद है। मतगणना के दोपहर 12 बजे तक रुझान से यह अंदाजा लग सकेगा कि किस पार्टी की सरकार बनेगी या विधानसभा में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलेगा या नहीं। सरकार बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 46 सीटों का है।

जम्मू-कश्मीर में इस बार तीन चरणों में वोटिंग हुई थी, जो 18 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चली और कुल 63.88% मतदान दर्ज किया गया। यह 2014 के 65% मतदान की तुलना में 1.12% कम है। मुख्य मुकाबले में नेशनल कॉन्फ्रेंस, कांग्रेस, भाजपा, और पीडीपी हैं, जबकि कई छोटी पार्टियां भी मैदान में हैं, जो अंतिम परिणाम में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

हाल ही में 5 अक्टूबर को जारी एग्जिट पोल में 5 सर्वे एजेंसियों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस गठबंधन को बहुमत का अनुमान लगाया है। वहीं, कुछ सर्वेक्षणों में हंग असेंबली का अनुमान जताया गया है, जिसका अर्थ है कि किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने की संभावना कम है। ऐसी स्थिति में निर्दलीय और छोटी पार्टियां किंगमेकर बन सकती हैं, जो अगली सरकार के गठन में निर्णायक भूमिका निभा सकती हैं।

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