



राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के पूर्व सचिव भवानी शंकर सामोता, संयुक्त सचिव राजेश भड़ाना, और कोषाध्यक्ष रामपाल को हाईकोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। सोमवार को जस्टिस समीर जैन की कोर्ट ने तीनों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है।
तीनों ने आरसीए में घोटाले से जुड़ी एफआईआर को रद्द कराने की मांग की थी, जिसे आरसीए की एडहॉक कमेटी ने दर्ज कराया था। अधिवक्ता एके जैन ने अदालत में पैरवी करते हुए कहा कि अगर इस मामले में जांच अथवा गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई, तो जांच प्रभावित होगी, क्योंकि यह मामला लगभग 150 करोड़ रुपये के घोटाले से संबंधित है। कोर्ट ने मामले में रोक लगाने से इनकार कर दिया।
पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने खेल सचिव से पूछा था कि किस आधार पर एक निजी संगठन (आरसीए) को स्टेडियम सौंपा गया। इस पर खेल सचिव नीरज के पवन ने बताया कि आरसीए को एमओयू के तहत स्टेडियम का कुछ हिस्सा दिया गया था, जिसका किराया आरसीए स्पोर्ट्स काउंसिल को देती थी। एमओयू की अवधि फरवरी 2024 में समाप्त हो गई है। कोर्ट ने सरकार का जवाब रिकॉर्ड में लेते हुए अगली सुनवाई 10 अक्टूबर को तय की है।
एडहॉक कमेटी द्वारा 8 अगस्त को दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया है कि याचिकाकर्ताओं ने अपने कार्यकाल के दौरान दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी कर आरसीए में करोड़ों का घोटाला किया। हाई कोर्ट ने पिछली सुनवाई में कहा था कि राज्य सरकार बदलते ही इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो जाता है और यह एक गंभीर मामला है, जहां सोसायटी के कुछ लोग स्टेडियम का दुरुपयोग कर रहे हैं।