



भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की हालिया रिपोर्ट के आधार पर कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) और ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (AIMRA) ने संयुक्त रूप से एक श्वेत पत्र जारी किया है। इस श्वेत पत्र में ई-कॉमर्स कंपनियाँ अमेज़न और फ्लिपकार्ट द्वारा भारत के खुदरा इकोसिस्टम पर हो रहे गंभीर प्रभावों पर प्रकाश डाला गया है।
श्वेत पत्र में इन कंपनियों द्वारा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) नीति और अन्य ई-कॉमर्स नियमों के उल्लंघनों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने अपने लाभ के लिए नियमों को तोड़ा-मरोड़ा और घरेलू खुदरा विक्रेताओं के लिए एक असमान प्रतिस्पर्धा का वातावरण तैयार किया है, जिससे छोटे और मध्यम विक्रेता हाशिए पर चले गए हैं।
FDI नीति का उल्लंघन: अमेज़न और फ्लिपकार्ट ने FDI नियमों का उल्लंघन कर विशेष विक्रेताओं को तरजीही सुविधाएँ दी हैं, जिनसे खुदरा बाजार की प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। ये नियम इसलिए बनाए गए थे ताकि घरेलू व्यापारियों को भी समान अवसर मिल सके, लेकिन इन कंपनियों ने इसे नज़रअंदाज़ किया है।
बाजार की विकृति: श्वेत पत्र में आरोप है कि अमेज़न और फ्लिपकार्ट ने गहरे डिस्काउंट और विशेष उत्पाद लॉन्च के जरिए बाजार में भारी विकृति पैदा की है। इसके चलते देश के छोटे और मध्यम खुदरा विक्रेताओं पर गहरा असर पड़ा है और कई व्यापारी व्यवसाय से बाहर हो गए हैं।
विशेष विक्रेताओं को समर्थन: रिपोर्ट के अनुसार, इन कंपनियों ने चुनिंदा विक्रेताओं को विशेष समर्थन दिया है, जिससे बाजार में अनुचित लाभ प्राप्त हुआ है। यह स्थिति व्यापारिक नैतिकता के खिलाफ है और इससे खुदरा व्यापार में असमानता बढ़ी है।
कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक के सांसद ने इस मौके पर देशभर के व्यापारियों से अपील की कि वे अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के अनैतिक व्यापारिक तरीकों का कड़ा विरोध करें। उन्होंने कहा कि ये कंपनियाँ भारत के खुदरा व्यापार को हड़पने की साजिश रच रही हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'वोकल फॉर लोकल' और 'मेक इन इंडिया' के दृष्टिकोण को कमजोर करने में लगी हैं।
सांसद ने कहा कि अब समय आ गया है कि व्यापारिक समुदाय संगठित होकर इन कंपनियों की भारत में जारी व्यापारिक गतिविधियों का विरोध करें। उन्होंने केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी हवाला दिया, जिन्होंने हाल ही में इन ई-कॉमर्स कंपनियों को उनके नियमों के उल्लंघन के बारे में चेतावनी दी थी।
श्वेत पत्र में कैट और एमरा ने सरकार से मांग की है कि वह अमेज़न और फ्लिपकार्ट के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करे। उन्होंने कहा कि इन कंपनियों ने भारतीय कानूनों और नियमों का स्पष्ट उल्लंघन किया है और यदि इन पर रोक नहीं लगाई गई, तो भारतीय खुदरा व्यापार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
कैट ने आरोप लगाया कि CCI की रिपोर्ट ने उन सभी आरोपों की पुष्टि की है, जो उन्होंने चार साल पहले लगाए थे। इसलिए अब CCI को कानूनी रूप से कार्रवाई करनी चाहिए और इन कंपनियों के व्यापारिक गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लगाना चाहिए।
ई-कॉमर्स नियमों का सख्त पालन: उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत ई-कॉमर्स नियमों को तुरंत जारी करना चाहिए, जिससे उपभोक्ता और विक्रेता दोनों को न्याय मिले।
व्यापारिक संचालन का निलंबन: अमेज़न और फ्लिपकार्ट के व्यापारिक संचालन को तब तक निलंबित किया जाना चाहिए जब तक कि वे पूरी तरह से FDI और ई-कॉमर्स नियमों का पालन न करें।
नियामक खामियों को बंद करना: नियामक खामियों को बंद करने के लिए एक सख्त नीतिगत ढांचा तैयार किया जाना चाहिए, जिससे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
उपभोक्ता शिकायतों का त्वरित समाधान: एक फास्ट ट्रैक प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए जिसे एक लोकपाल द्वारा संचालित किया जाए, जिससे उपभोक्ता शिकायतों का त्वरित समाधान हो सके।
जीएसटी इनपुट क्रेडिट पर छूट: B2C ई-कॉमर्स लेनदेन के लिए GST इनपुट क्रेडिट पर छूट देना चाहिए ताकि कर चोरी को रोका जा सके और सरकार को राजस्व का नुकसान न हो।
प्रतिस्पर्धा विरोधी कैशबैक पर प्रतिबंध: अनन्य कैशबैक योजनाओं पर प्रतिबंध लगाना चाहिए, जो बाजार में अनुचित प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करती हैं और ग्रे मार्केट को बढ़ावा देती हैं।
विलासिता कर: ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बेचे जाने वाले उच्च श्रेणी के उत्पादों पर विलासिता कर लगाया जाना चाहिए ताकि ऑनलाइन और ऑफलाइन खुदरा विक्रेताओं के बीच समानता स्थापित की जा सके।
विशेष बिक्री पर प्रतिबंध: विशेष उत्पाद लॉन्च और डिस्काउंट बिक्री, जो अक्सर अनुचित लाभ और हेरफेर के लिए इस्तेमाल होती हैं, को तब तक निलंबित करना चाहिए जब तक कि सभी मुद्दों का समाधान न हो जाए।
श्वेत पत्र ने भारतीय खुदरा व्यापार और सरकार के लिए एक चेतावनी दी है कि अगर अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों के अनैतिक व्यापारिक तरीकों पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो इसका गंभीर असर भारतीय खुदरा व्यापार और अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। कैट और एमरा ने इस मुद्दे पर त्वरित सरकारी हस्तक्षेप की मांग की है ताकि घरेलू खुदरा व्यापार को बचाया जा सके और निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित की जा सके।