Saturday, 29 August 2026

पुणे में दसवीं विश्व संसद: देश आंकड़ों से समृद्ध होगा या आमजन की खुशहाली से: डॉ. महेंद्र मधुप


पुणे में दसवीं विश्व संसद: देश आंकड़ों से समृद्ध होगा या आमजन की खुशहाली से:  डॉ. महेंद्र मधुप

एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे में आयोजित तीन दिवसीय दसवीं विश्व संसद के दूसरे दिन शुक्रवार को सुविख्यात कृषि पत्रकार और मिशन फार्मर साइंटिस्ट परिवार एवं मिशन पर्यावरण योद्धा परिवार के फाउंडर डॉ. महेंद्र मधुप ने वैश्विक ऊष्मीकरण और टिकाऊ विकासात्मक लक्ष्यों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि हमें यह तय करना होगा कि देश आंकड़ों से समृद्ध होगा या आमजन की खुशहाली से। केवल तभी टिकाऊ विकासात्मक लक्ष्य पूर्ण हो सकते हैं, जब समाज में न्यूनतम सुखों का संतुलन हो।

डॉ. महेंद्र मधुप ने अपने संबोधन में कहा कि यदि एक व्यक्ति अपने जीवन में सौ लोगों को खुशहाल बना सके, तो उसका जीवन सार्थक हो जाएगा। उन्होंने टिकाऊ विकास और पर्यावरण संरक्षण के महत्त्व पर जोर देते हुए कहा कि पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाए बिना, इस समस्या से मुक्ति नहीं मिल सकती।

विशेष तौर पर उन्होंने किसानों की स्थिति पर भी प्रकाश डाला और बताया कि कैसे भारत में सामान्य किसान कृषि उत्पादन तक सीमित रह जाता है, जबकि मूल्य संवर्धन और बिक्री का लाभ उसे नहीं मिल पाता। उनके मिशन फार्मर साइंटिस्ट परिवार के जरिए उन्होंने किसानों को ‘फार्मर साइंटिस्ट’ का नाम दिया और उन्हें कृषि को उद्योग के रूप में देखने के लिए प्रेरित किया। इस प्रयास से कई किसानों की आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार हुआ और उनकी आय लाखों से करोड़ों तक पहुंची।

डॉ. मधुप ने एमआईटी वर्ल्ड पीस यूनिवर्सिटी, पुणे की सराहना करते हुए कहा कि मूल्य आधारित वैश्विक शिक्षा और अहिंसक संस्कृति को बढ़ावा देने के उनके प्रयास प्रशंसनीय हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस विश्व संसद से ऐसे व्यावहारिक समाधान सामने आएंगे, जो मानव जाति को शक्तिशाली वर्गों के निहित स्वार्थों से बचा सकें।

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