



वैशाली नगर के चौरसियावास अभियंता नगर में भूखंड की दीवार को निगम की जेसीबी से ध्वस्त करने के मामले में कनिष्ठ अभियंता (जेईएन) कामना रावत की परेशानियां बढ़ती नजर आ रही हैं। आरोप है कि जेईएन ने विधिक प्रक्रिया को नजरअंदाज करते हुए पार्षद वीरेंद्र वालिया के बुलाने पर मौके पर पहुंचकर दीवार को जेसीबी से ध्वस्त कराया। इस घटना पर वैश्य समाज ने आपत्ति जताते हुए पुलिस अधीक्षक और निगम आयुक्त देशलदान से शिकायत की थी।
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए निगम आयुक्त देशलदान ने उपायुक्त (प्रशासन) अनिता चौधरी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी गठित की है। यह कमेटी घटना की तथ्यात्मक जांच करेगी और अपनी रिपोर्ट निगम आयुक्त को सौंपेगी।
वैश्य समाज के पार्षद नकुल खंडेलवाल और मनीष सेठी सहित अन्य सदस्यों ने निगम आयुक्त को सौंपे गए ज्ञापन में जेईएन, जमादार, और सफाई कर्मी द्वारा भूखंड स्वामी दिनेश खंडेलवाल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को अनुचित बताया है। ज्ञापन में इस बात पर सवाल उठाए गए हैं कि जेईएन ने बिना सक्षम अनुमति के मौके पर पहुंचकर निजी संपत्ति को ध्वस्त करने का आदेश दिया, जबकि किसी प्रकार की नोटिस या सुनवाई की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। साथ ही, उन्होंने इस बात की भी जांच की मांग की है कि मौके पर पार्षद और उनके पुत्र द्वारा मारपीट की घटना की भी सही तरीके से जांच हो।
निगम कर्मचारी संघ ने भी अभियंता के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी का विरोध किया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि अभियंता पार्षद की सूचना पर कार्यवाही करने गई थी और उसे जानबूझ कर फंसाया जा रहा है।
गौरतलब है कि इस मामले में क्रिश्चियनगंज थाने में परस्पर मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें 50 लाख रुपए की मांग करने और दीवार ध्वस्त करने के आरोप शामिल हैं।
निगम आयुक्त देशलदान ने कहा कि वैश्य समाज का ज्ञापन प्राप्त हुआ है और मामले की जांच के लिए कमेटी का गठन किया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।