



राजस्थान में होने वाले विधानसभा उपचुनाव-2024 के दौरान सोशल मीडिया, डिजिटल मीडिया, मोबाइल फोन, कॉलर ट्यून और रिंगटोन के माध्यम से बिना प्रमाणित राजनीतिक विज्ञापन, संदेश या अपील प्रसारित करने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने सोमवार को उपचुनाव की तैयारियों के क्रम में संचार व्यवस्था की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि आदर्श चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने पर जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 और भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत संबंधित व्यक्ति और सेवा प्रदाताओं (टेलीकॉम कंपनियां, मीडिया प्लेटफॉर्म और बल्क मैसेजिंग फर्म) के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य निर्वाचन अधिकारी महाजन ने टेलीकॉम कंपनियों को निर्देश दिया कि वे उपचुनाव वाले 7 विधानसभा क्षेत्रों में संचार व्यवस्था को सुदृढ़ करें, ताकि मतदान दलों और अधिकारियों के बीच त्वरित और बाधा-रहित संचार सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही, सलूम्बर और चौरासी (डूंगरपुर) विधानसभा क्षेत्रों के दूर-दराज क्षेत्रों में चिन्हित 11 संचार विहीन (शैडो एरिया) मतदान केंद्रों पर भी विशेष संचार व्यवस्था उपलब्ध कराने की बात कही गई।
बैठक में पुलिस महानिदेशक (संचार) अनिल पालीवाल ने कहा कि राजस्थान पुलिस इन शैडो एरिया मतदान केंद्रों पर वायरलेस नेटवर्क के जरिए बाधा-रहित संचार व्यवस्था सुनिश्चित करेगी। साथ ही, अन्य आवश्यक स्थानों पर भी पुलिस वायरलेस सिस्टम के जरिए बेहतर संचार नेटवर्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
पालीवाल ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया और अन्य संचार माध्यमों से आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के मामलों की रिपोर्टिंग के लिए पुलिस हेल्पलाइन मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं। इस क्रम में पुलिस महानिरीक्षक श्री शरत कविराज को राज्य स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
बैठक में राजस्थान पुलिस के टेली कम्युनिकेशन विभाग के अधिकारी, भारत सरकार के दूरसंचार विभाग, ट्राई, बीएसएनएल राजस्थान, और विभिन्न मोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।