



कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कैबिनेट बैठक में शामिल होकर अपने बगावती तेवर दिखाए, परंतु उनका प्रयास विफल साबित हुआ। उन्होंने एसआई भर्ती रद्द करने और तबादला नीति पर शीघ्र निर्णय की मांग की, लेकिन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कोई निर्णय नहीं लिया। मीणा का यह कदम केवल नाटक प्रतीत हुआ, क्योंकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व बीएल संतोष और मदन राठौड़ फिलहाल कोई कठोर निर्णय लेने के पक्ष में नहीं हैं। इस प्रकरण से पार्टी में समन्वय की कमी उजागर हुई, जिससे विपक्ष को निशाना साधने का मौका मिला। अनुशासनहीनता पर लगाम लगाना जरूरी हो गया है, नहीं तो इससे भाजपा को नुकसान हो सकता है।
रविवार को कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कैबिनेट बैठक में शामिल होकर एसआई भर्ती परीक्षा रद्द करने और तबादला नीति पर शीघ्र निर्णय की मांग की। हालांकि, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दोनों मुद्दों को गंभीरता से लिया, लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया। मीणा ने कैबिनेट बैठक के बाद कहा कि वह भाजपा संगठन के निर्देश पर बैठक में शामिल हुए, लेकिन अब से वह विधायक के रूप में ही अपना दायित्व निभाएंगे।
मुख्यमंत्री ने तबादला नीति पर कहा कि चिकित्सा और शिक्षा विभाग में अल्प समय में तबादला करना संभव नहीं है, विशेषकर उपचुनाव और आचार संहिता के कारण। अधिकतर मंत्रियों ने तबादलों की अनुमति देने की वकालत की, लेकिन कोई निर्णय नहीं हुआ। कैबिनेट ने यह निर्णय मुख्यमंत्री पर छोड़ दिया।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की मांगें, जैसे कि सीबीआई जांच और एसआईटी की भूमिका पर सवाल, सरकार के कामकाज पर विपक्ष को हमला करने का मौका दे रही हैं। यह समन्वय की कमी को उजागर करती हैं, जो भाजपा के लिए हानिकारक हो सकता है। अब भाजपा नेतृत्व को डॉ. किरोड़ी लाल मीणा की गतिविधियों पर कड़ा निर्णय लेने की जरूरत है, अन्यथा अनुशासनहीनता बढ़ सकती है, जो पार्टी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।