



जयपुर: आरटीआई एक्टिविस्ट अशोक पाठक ने कांग्रेस राज में बिजली टेंडरों में 600 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस सरकार ने आचार संहिता से ठीक पहले चहेती फर्म को 600 करोड़ के ठेके आवंटित करने के लिए नियमों की अनदेखी की। पाठक ने दावा किया कि विद्युत विभाग (जयपुर डिस्कॉम) में टेंडरों की प्रक्रिया में हेराफेरी की गई और केवल एक ही फर्म को लाभ पहुंचाने के लिए सभी शर्तें ऐसी रखी गईं कि अन्य कोई कंपनी आवेदन न कर सके।
600 करोड़ का घोटाला और चहेती फर्म को ठेका
अशोक पाठक ने आरोप लगाया कि तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस नेता गोविंद डोटासरा ने विधानसभा चुनावों की घोषणा से पहले ही इस घोटाले को अंजाम दिया। जयपुर डिस्कॉम के एम.डी. आर.एन. कुमावत पर भी आरोप है कि उन्होंने गहलोत सरकार की कृपा से फर्म को ठेका दिलाने के लिए नियमों की अनदेखी की।
चहेती फर्म के लिए बनाई गई विशेष शर्तें
आरटीआई एक्टिविस्ट के अनुसार, जयपुर डिस्कॉम द्वारा चहेती फर्म मैसर्स आर.सी. इंटरप्राइजेज को फायदा पहुंचाने के लिए टेंडर की फीस और प्रक्रिया को जानबूझकर ऑफलाइन रखा गया, ताकि अन्य कंपनियां आवेदन न कर सकें। केवल चहेती फर्म को ही टेंडर फीस जमा करने की अनुमति दी गई, जिससे अन्य कंपनियों को बाहर रखा गया।
टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी और समय से पहले वर्क ऑर्डर जारी
पाठक ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया को जल्दबाजी में निपटाया गया, जिसमें टेक्निकल और फाइनेंशियल बिड एक ही दिन में समाप्त कर दी गई। 9 अक्टूबर 2023 को आचार संहिता लागू होने से पहले ही 5 अक्टूबर को वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया।
कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप
अशोक पाठक ने कहा कि यह घोटाला केवल चुनाव के लिए ब्लैक मनी जुटाने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि गहलोत सरकार ने चहेती फर्मों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए सरकारी खजाने पर डाका डाला और जनता के पैसे का दुरुपयोग किया।