Saturday, 29 August 2026

सवाई माधोपुर से जयपुर तक अवैध बजरी खनन का खेल जारी, खान विभाग और पुलिस की मिलीभगत से हो रही छूट


सवाई माधोपुर से जयपुर तक अवैध बजरी खनन का खेल जारी, खान विभाग और पुलिस की मिलीभगत से हो रही छूट

सवाई माधोपुर क्षेत्र से जयपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अवैध बजरी खनन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। सूत्रों के अनुसार, बजरी खनन पर लगे प्रतिबंधों के बावजूद बजरी के ट्रक रोजाना बिना किसी रुकावट के पुलिस और खान विभाग की मिलीभगत से जयपुर पहुंच रहे हैं।

नीलामी की आड़ में अवैध खनन
सवाई माधोपुर के चौथ का बरवाड़ा, शिवाड़, महापुरा, भगवतपुरा और टोंक जिलों में खान विभाग द्वारा जब्त बजरी की नीलामी की गई थी। लेकिन नीलामी में हिस्सा लेने वालों को जारी किए गए रवन्ना (बजरी बेचने के परमिट) ही अवैध खनन को बढ़ावा दे रहे हैं। नीलामी के तहत बेची गई बजरी के स्टॉक की जगह, सिवायचक जमीन से बजरी निकालकर बेची जा रही है, और नीलामी की शर्तों का पूरी तरह से उल्लंघन किया जा रहा है।

पुलिस-खान विभाग की मिलीभगत
सूत्रों का दावा है कि सवाई माधोपुर क्षेत्र से जयपुर के लिए रोजाना बजरी से भरे ट्रक निकल रहे हैं। इन ट्रकों के मार्ग में पड़ने वाले पुलिस थानों, जैसे कि झिलाय, बरौनी, निवाई, चाकसू और सांगानेर के थानों में बिना किसी रुकावट के ट्रक ‘सेवा’ कर निकल जाते हैं।

सभी को है जानकारी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं
बनास नदी के भीलवाड़ा-आसीन्द क्षेत्र में खान से बजरी खनन लगभग बंद हो चुका है, लेकिन फिर भी बड़ी मात्रा में बजरी बाजार में बेची जा रही है। जांच में पाया गया कि 11 टन के रवन्ना पर 70-80 टन बजरी भेजी जा रही है, जो अवैध खनन का स्पष्ट प्रमाण है।

नियमों की अनदेखी
बजरी नीलामी की शर्तों के अनुसार, खान विभाग का एक अधिकारी स्टॉक के पास तैनात होना चाहिए और ट्रक रवाना होने से पहले उसकी फोटो-वीडियो रिकॉर्डिंग और वजन का सत्यापन करना चाहिए। लेकिन ये प्रक्रिया कभी पूरी नहीं होती। साथ ही, जीपीएस सिस्टम के बिना ट्रक रवाना किए जा रहे हैं और कई बार बिना रवन्ना के ही ट्रक भेजे जाते हैं। पकड़े जाने पर, खोए हुए रवन्ना का बहाना बनाकर नया रवन्ना जारी कर दिया जाता है।

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