



शहर में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर से साइबर क्रिमिनल्स ने 35 लाख रुपए ठगने का मामला सामने आया है। मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी देकर अपराधियों ने सॉफ्टवेयर इंजीनियर को 27 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा और वीडियो कॉल के जरिए लगातार धमकाते हुए पैसे ऐंठे। इस मामले में पीड़ित ने जयपुर कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में गुरुवार को एफआईआर दर्ज करवाई है।
घटना का विवरण: पुलिस के अनुसार, पीड़ित सॉफ्टवेयर इंजीनियर जयपुर में एक कंपनी में काम करता है। 24 सितंबर को दोपहर करीब 12 बजे उसके मोबाइल पर एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को एक नामी कुरियर कंपनी का कर्मचारी बताया और कहा कि उनके नाम का पार्सल मुंबई से ताइवान भेजा जा रहा है। फोन करने वाले ने बताया कि पार्सल को अरमान नाम के व्यक्ति ने बुक करवाया है और इसमें भारी मात्रा में ड्रग्स मिली है, जिसकी सूचना पुलिस को दी गई है।
कुछ देर बाद एक और फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को पुलिस अधिकारी बताया और पीड़ित को एनडीपीएस एक्ट के तहत केस में फंसाने की धमकी दी। आरोपी ने पीड़ित से आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज मांगे और बाद में मनी लॉन्ड्रिंग का केस भी बनाने की धमकी दी।
कैसे हुई ठगी: साइबर अपराधियों ने पीड़ित को वीडियो कॉल से जोड़ लिया और धमकाते हुए 35 लाख रुपए ऐंठ लिए। उन्होंने पहले पीड़ित के बैंक अकाउंट से 15 लाख रुपए निकाले और फिर एक एप्लिकेशन डाउनलोड करवाकर ऑनलाइन 20 लाख रुपए का लोन दिलवाकर उसे भी हड़प लिया।
पीड़ित को 27 घंटे तक डिजिटल अरेस्ट में रखा गया, जिसमें साइबर ठगों ने निगरानी के लिए रात में सोते समय भी वीडियो कॉल जारी रखवाई।
पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है और साइबर क्रिमिनल्स की तलाश की जा रही है। इस घटना ने डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते खतरे की ओर एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की आवश्यकता है।