



जयपुर के राजापार्क स्थित दशहरा मैदान में आज से शुरू हुए पांच दिवसीय हिंदू आध्यात्मिक और सेवा मेले का उद्घाटन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने किया। उद्घाटन समारोह में प्रमुख संतों और आध्यात्मिक नेताओं ने सनातन धर्म की महत्ता और उसकी वैश्विक प्रतिष्ठा पर जोर दिया।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ का राष्ट्रवादी वीरों को नमन: "इस भूमि के कण-कण में राष्ट्रवाद की महक"
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने एक कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा, "मैं सैनिक स्कूल में पढ़ा हूं और महाराणा सांगा के जीवन से प्रेरित हुआ हूं। केसरी सिंह बारहठ और वीर दुर्गादास राठौड़ जैसी महान विभूतियों की धरती को प्रणाम करता हूं। इस भूमि के कण-कण में राष्ट्रवाद की महक आती है।"
उन्होंने यह भी कहा कि इस कार्यक्रम में शामिल होना उनके लिए गर्व की बात है, और राष्ट्र के प्रति इस भूमि के योगदान को उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित की।
चिदानंद सरस्वती ने अपने संबोधन में कहा कि पहले भारत को सांपों की पूजा करने वाला देश समझा जाता था, लेकिन हमने पूरी दुनिया को यह सिखाया कि सनातन और हिंदू धर्म का असली अर्थ क्या है। आज जब पूरी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की बात कर रही है, तब हम ऋषि इंटेलिजेंस (RI) का संदेश देंगे, जो दुनिया को नई दिशा देगा। उन्होंने कहा कि भारत ही वह देश है जो समूची दुनिया को सही दृष्टि दे सकता है।
साध्वी ऋतम्भरा ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी क्षत्रिय राजपूतानियों ने जौहर किया था, और हम किसी भी लालच के लिए धर्म परिवर्तन नहीं करेंगे। उन्होंने धर्म के प्रति निष्ठा और समर्पण का आह्वान किया।
चिदानंद सरस्वती ने यह भी कहा कि आज पूरी दुनिया में सनातन धर्म का सम्मान बढ़ रहा है, लेकिन दुख की बात है कि भारत के कुछ लोग विदेशों में जाकर इस पर सवाल उठाते हैं। सनातन धर्म सबको साथ लेकर चलता है, और यही इसकी सबसे बड़ी विशेषता है।
उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान भारत की भूमिका की सराहना की, जब भारत ने कई देशों को मुफ्त वैक्सीन प्रदान की थी। सरस्वती ने कहा कि यह समय अकेले चलने का नहीं है, और RSS इसी सिद्धांत पर काम कर रहा है, जो भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।
इस मेले में विभिन्न आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सेवा गतिविधियों के माध्यम से सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति के विविध पहलुओं का प्रदर्शन किया जाएगा।
साध्वी ऋतंभरा का संदेश: चुनौतियों का सामना और हिंदू संगठन की जरूरत
जयपुर के हिंदू आध्यात्मिक और सेवा मेले के उद्घाटन सत्र में साध्वी ऋतंभरा ने अपने संबोधन में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हमारे सामने अनेक चुनौतियां हैं, लेकिन हमने उन चुनौतियों को स्वीकार किया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचारक मां भारती की सेवा में समर्पित हो चुके हैं, और बांग्लादेश में हिंदू महिलाओं के साथ हो रहे अत्याचारों ने हमें गहराई से सोचने पर मजबूर कर दिया है।
साध्वी ऋतंभरा ने कहा कि एक या दो बेटियों की मां रात को चैन से नहीं सो पाती है, लेकिन वह हजारों बेटियों की मां हैं। उनका कर्तव्य सिर्फ बेटियों को पढ़ाना ही नहीं, बल्कि उनकी शादी तक की जिम्मेदारी निभाना भी है। उन्होंने विपत्तियों से घिरे वर्तमान समय में हिंदुओं को संगठित रहने और जातियों के विभाजन से ऊपर उठकर एकजुट हिंदू बने रहने का आह्वान किया।
साध्वी ऋतंभरा ने चित्तौड़ की वीरांगनाओं को याद करते हुए कहा कि वे चित्तौड़ की धरती को प्रणाम करना चाहती हैं, जहां की देवियों ने अपनी आबरू की रक्षा के लिए ज़हर नहीं खाया, बल्कि अग्नि स्नान करके अपने प्राण त्यागने का निर्णय लिया। उनके इस साहसिक बलिदान को साध्वी ने श्रद्धांजलि दी और आज की महिलाओं को भी उसी साहस के साथ खड़े रहने की प्रेरणा दी।
सनातन धर्म से दुनिया को सही दिशा मिलेगी: श्याम चरण महाराज
जयपुर के राजापार्क स्थित दशहरा मैदान में चल रहे हिंदू आध्यात्मिक और सेवा मेले के उद्घाटन सत्र में श्याम चरण महाराज ने अपने संबोधन में सनातन धर्म की महत्ता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हम हिंदू हैं और हमारी संस्कृति से श्रेष्ठ कोई संस्कृति और धर्म नहीं है। सिर्फ सनातन धर्म ही ऐसा धर्म है जो पूरी दुनिया को सही दिशा देने की क्षमता रखता है।
श्याम चरण महाराज के इस वक्तव्य ने सनातन धर्म और उसकी वैश्विक महत्ता पर जोर देने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति की श्रेष्ठता की बात की।
सांस्कृतिक संध्या और विशेष आयोजन:
कार्यक्रम के दौरान हर शाम को सांस्कृतिक संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक और सेवा कार्यों की प्रदर्शनी प्रस्तुत की जाएगी। इनमें सेवा कार्यों की प्रदर्शनी, विज्ञान मॉडल प्रदर्शनी, शौर्य मंडपम, भारतीय मूल्य पर लाइव पेंटिंग, और दादी-नानी का घर जैसे विशेष कार्यक्रम भी शामिल होंगे। ये आयोजन न केवल पारंपरिक भारतीय मूल्यों को प्रदर्शित करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति से परिचित कराने का प्रयास भी करेंगे।