



पुलिस मुख्यालय ने आम नागरिकों को 'फर्जी ई-चालानों' से बचाने और वैध और अवैध एसएमएस की पहचान करने में सहायता के लिए एक एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह कदम उठाया गया है ताकि लोग ठगी का शिकार न हों।
साइबर क्राइम डीजी हेमंत प्रियदर्शी ने बताया कि ई-चालान के मैसेज केवल रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस द्वारा भेजे जाते हैं और कभी भी व्हाट्सएप पर नहीं भेजे जाते। वैध ई-चालान का एसएमएस हैडर हमेशा "VAAHAN" होता है, और इसमें चालान के भुगतान के लिएhttps://echallan.parivahan.gov.in लिंक शामिल होता है। साइबर अपराधी मिलते-जुलते फर्जी यूआरएल (.rajasthan, .org आदि) से नकली चालान भेजकर ठगी करने का प्रयास कर सकते हैं।
फर्जी ई-चालानों से बचने के उपाय:
व्हाट्सएप पर चालान मैसेज नहीं आता: ई-चालान का मैसेज कभी भी व्हाट्सएप पर नहीं भेजा जाता। केवल एसएमएस द्वारा वैध ई-चालान भेजा जाता है।
मैसेज की वैधता जांचें: वैध एसएमएस की पहचान के लिए नागरिक 1909 पर "DETAILS OF <HEADER>" लिखकर एसएमएस भेज सकते हैं। यदि एसएमएस वैध होगा तो "VAAHAN" हेडर की जानकारी सरकार के द्वारा दी जाएगी। इसके अलावाhttps://smsheader.trai.gov.in/ पर जाकर भी हेडर की वैधता जांची जा सकती है।
पोस मशीन और mParivahan ऐप का उपयोग करें: अगर चालान पर संदेह हो, तो यातायात पुलिस के पास उपलब्ध पोस मशीन पर चालान नंबर की जांच कर सकते हैं या mParivahan ऐप के माध्यम से भुगतान कर सकते हैं।
पुलिस मुख्यालय ने नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और फर्जी ई-चालान से बचें, ताकि साइबर ठगी का शिकार न हों।