



संजीवनी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी मामले में हाईकोर्ट के फैसले के बाद केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सत्य को छिपाने की कोशिश की गई थी, लेकिन अंत में सत्य की जीत होती है। शेखावत ने आरोप लगाया कि उन्हें झूठे षड्यंत्र के तहत राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और बेटे की हार से उत्पन्न खीझ के चलते इस मामले में घसीटने की कोशिश की गई थी।
हाईकोर्ट ने एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की जांच को रद्द करते हुए कहा कि बिना न्यायालय की अनुमति के शेखावत के खिलाफ आगे की जांच नहीं की जा सकती। शेखावत ने इस फैसले को सत्य की जीत करार देते हुए कहा कि उनके चरित्र हरण के प्रयास करने वालों को न्यायालय ने तमाचा लगाया है।
एसओजी की ओर से कोर्ट में पेश की गई विस्तृत रिपोर्ट में यह साफ किया गया कि गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ कोई भी सबूत नहीं है, और निदेशक के पद से इस्तीफा देने के बाद कंपनियों में हुए कृत्यों के लिए उन्हें जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
कोर्ट ने एसओजी की रिपोर्ट के आधार पर गजेंद्र सिंह शेखावत के खिलाफ मामला नहीं बनता है और एसओजी बिना ट्रायल कोर्ट की अनुमति के उनके खिलाफ आगे की जांच नहीं कर सकती।