



मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासन के अपने संकल्प को जारी रखते हुए कई महत्वपूर्ण अनुशासनात्मक कदम उठाए हैं। राज्य की प्रतियोगी परीक्षाओं में शुचिता बनाए रखने की नीति के तहत मुख्यमंत्री शर्मा ने आरएएस प्रारंभिक परीक्षा-2013 में पेपर लीक करने वाले एक आरोपी व्याख्याता को राजकीय सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई राजकीय सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों पर रोक) अधिनियम 1992 के तहत की गई है।
मुख्यमंत्री शर्मा ने भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 17-ए के तहत जल जीवन मिशन से जुड़े 12 अधिकारियों के खिलाफ परिवाद दर्ज करने और विस्तृत जांच एवं अनुसंधान के लिए पूर्वानुमोदन प्रदान किया है। यह कदम राज्य सरकार की भ्रष्टाचार के खिलाफ कठोर नीति का एक और उदाहरण है।
मुख्यमंत्री ने नियम 16 सीसीए के तहत सेवारत और सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ संचालित अनुशासनात्मक कार्रवाई के 4 मामलों में प्रमाणित आरोपों का अनुमोदन किया है। इसमें सेवारत अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने का निर्णय लिया गया है, जो अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को दर्शाता है।
मुख्यमंत्री शर्मा की यह कार्रवाई राज्य सरकार की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है, जिसमें किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता और भ्रष्टाचार के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।