Saturday, 29 August 2026

निलंबित हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने के आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता सुधांशु गिल ने हाई कोर्ट में याचिका की दायर


निलंबित हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने के आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता सुधांशु गिल ने हाई कोर्ट में याचिका  की दायर

निलंबित हेरिटेज मेयर मुनेश गुर्जर को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट देने के आदेश के खिलाफ शिकायतकर्ता सुधांशु गिल ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। भ्रष्टाचार निरोधक विभाग (एसीबी) ने 19 सितंबर को मुनेश गुर्जर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन वह न्यायालय में उपस्थित नहीं हुईं। उनके अधिवक्ता ने एक प्रार्थना पत्र पेश करते हुए बताया कि मुनेश गुर्जर बीमार हैं और डॉक्टर ने उन्हें 7 दिन का बेड रेस्ट करने की सलाह दी है।

शिकायतकर्ता के अधिवक्ता पूनम चंद भंडारी ने इस प्रार्थना पत्र का विरोध किया था, लेकिन एसीबी कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए मुनेश को 5 अक्टूबर 2024 को पेश होने की अनुमति दे दी। इस आदेश के खिलाफ सुधांशु गिल के अधिवक्ता ने हाई कोर्ट में एक फौजदारी याचिका दायर कर मांग की है कि अधीनस्थ न्यायालय का आदेश रद्द किया जाए और मुनेश गुर्जर को तुरंत समर्पण करने के निर्देश दिए जाएं।

याचिका में तर्क दिया गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो अभियुक्त को प्रसंज्ञान लेने से पहले न्यायालय में उपस्थिति से छूट दे। न्यायालय द्वारा दिया गया आदेश कानून के विपरीत है और भ्रष्टाचारियों के खिलाफ उदार रुख अपनाया गया है, जिससे आम जनता में गलत संदेश जाता है। बड़े लोगों और भ्रष्टाचारियों के मामलों में न्यायपालिका की सख्ती कम होती प्रतीत होती है, जबकि ऐसे मामलों में कड़ा रुख अपनाया जाना चाहिए।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा है कि मेयर ने बीमारी का बहाना बनाया है, इसलिए उनकी बीमारी की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड गठित किया जाना चाहिए था। इसके अलावा, सरकार और एसीबी ने जानबूझकर मेयर को बचाने की कोशिश की है, क्योंकि पब्लिक प्रॉसिक्यूटर ने भी प्रार्थना पत्र का विरोध नहीं किया और सहमति जताई। डॉक्टर की पर्ची में केवल 7 दिन का बेड रेस्ट बताया गया था, फिर भी न्यायालय ने उन्हें 16 दिन का समय दिया, जो अनुचित है।

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