



राज्यपाल हरिभाऊ बागडे सोमवार को राजापार्क स्थितगोपाल मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने चक्रधर प्रभु और भगवान गोविन्द प्रभु महाराज की पूजा-अर्चना कर राष्ट्र और राज्य की समृद्धि व खुशहाली की प्रार्थना की। राज्यपाल बागडे ने इस अवसर पर संतों की शिक्षाओं से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

राज्यपाल बागडे ने कहा कि चक्रधर स्वामी और गोविन्द प्रभु महाराज ने समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने का महत्वपूर्ण कार्य किया और समाज को रूढ़ियों के बंधनों से मुक्त किया। उन्होंने कहा कि चक्रधर स्वामी केवल वैष्णव परंपरा के प्रमुख प्रतिपादक नहीं थे, बल्कि उन्होंने मानवता के धर्म को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। उन्होंने समाज के सभी वर्गों को जोड़ने के लिए महानुभव पंथ की स्थापना की।
राज्यपाल बागडे ने कहा कि चक्रधर स्वामी को मराठी भाषा के जन्मदाता के रूप में भी माना जाता है। उनकी शिष्या कवयित्री महदंबा ने उनके जीवन और शिक्षाओं को मराठी साहित्य में दर्ज किया, और लीलाचरित्र में उनकी जीवनी समाविष्ट है।
राज्यपाल बागडे ने चक्रधर स्वामी की चार प्रमुख शिक्षाओं पर प्रकाश डाला— अहिंसा, तप, ब्रह्मचर्य और भक्ति। उन्होंने कहा कि चक्रधर स्वामी ने मराठी भाषा में अपने उपदेश दिए, जो सरल और अर्थपूर्ण होते थे, और जिनसे जीवन के गूढ़ मर्म को समझा जा सकता है।
गोविन्द प्रभु को राज्यपाल ने एक महान समाज सुधारक बताया, जिन्होंने छुआछूत और जात-पात के भेदभाव से समाज को मुक्त करने का कार्य किया। राज्यपाल ने कहा कि गोविन्द प्रभु के विचारों का प्रारंभ में विरोध हुआ, लेकिन उन्होंने इसकी परवाह नहीं की और समाज सुधार में अपना योगदान जारी रखा।
राज्यपाल बागडे ने संतों के आदर्श जीवन को जन-जन के लिए प्रेरणा स्रोत बताते हुए कहा कि इन संतों की शिक्षाओं से समाज को एकजुट और प्रगतिशील बनाने में मदद मिलती है।