



राज्यपाल बागडे ने अपने संबोधन में शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। परिवार और मां से मिली शुरुआती शिक्षा से ही बच्चे विशेष योग्यताओं को अर्जित करने लगते हैं। शिक्षक को विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम के साथ-साथ सहशैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से व्यवहारिक ज्ञान भी प्रदान करना चाहिए, ताकि उनका बौद्धिक विकास हो और वे समाज में सकारात्मक योगदान कर सकें।

राज्यपाल बागडे ने नई शिक्षा नीति में गोलवकर ‘गुरूजी’ के विचारों को शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा में सुधार के लिए बनी नीतियों और आयोगों के सुझाओं का प्राथमिक शिक्षा पर सकारात्मक प्रभाव पड़ना चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में 'राष्ट्र प्रथम' का भाव जागृत हो सके।
राज्यपाल बागडे ने भारतीय शिक्षा पद्धति में संस्कृति, धर्म, और नैतिक आदर्शों के समावेश पर जोर दिया, जिससे महर्षि दयानंद सरस्वती जैसे महापुरुषों के सद्गुणों को अपनाकर विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास हो सके। इस अवसर पर उन्होंने अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की भी सराहना की।