



राजस्थान सरकार अब सोशल मीडिया और मीडिया में किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने वाले नौकरशाहों (अधिकारियों और कर्मचारियों) पर सख्त कार्रवाई की योजना बना रही है। सरकार के निर्णय, नीतियों, पार्टी, संस्थानों या किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ टिप्पणी करने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए गए हैं। इस संबंध में सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों (एचओडी) को आदेश जारी किए हैं कि ऐसी शिकायतें मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाए।
इस दिशा में कार्मिक विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों, संभागीय आयुक्तों, विभिन्न विभागों के एसीएस, प्रमुख शासन सचिवों, सभी विभागों के विभागाध्यक्षों और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को एक पत्र जारी किया है। इसमें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि किसी भी अधिकारी या कर्मचारी द्वारा सरकार, किसी पार्टी, संस्थान या व्यक्ति विशेष पर सोशल मीडिया या मीडिया के माध्यम से अनर्गल आरोप लगाने पर कठोर कार्यवाही की जाएगी।
दरअसल, सरकार ने इस संबंध में वर्ष 2017 में भी एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में बताया गया था कि कई कर्मचारी-अधिकारी अपने सहयोगियों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप सोशल मीडिया या मीडिया के माध्यम से प्रचारित करते हैं, जिससे विभाग की छवि को नुकसान पहुंचता है। इसके अलावा, कई बार अधिकारी या कर्मचारी किसी व्यक्ति विशेष, संस्थान या राजनीतिक पार्टी के खिलाफ सार्वजनिक रूप से आरोप लगाकर उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हैं।
सरकार ने अखिल भारतीय सेवाएं (आचरण) और राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण) के नियमों के तहत ऐसे कर्मचारियों पर कठोर कार्यवाही करने का आदेश दिया था। इन नियमों के तहत, अधिकारियों और कर्मचारियों को सरकार, संस्थान या व्यक्तियों के खिलाफ सार्वजनिक तौर पर कोई बयानबाजी या आरोप-प्रत्यारोप से बचने की हिदायत दी गई थी।
सरकार द्वारा सात साल पहले जारी इन आदेशों की पालना पूरी तरह से नहीं हो रही थी, इसलिए अब एक बार फिर कार्मिक विभाग ने सभी विभागाध्यक्षों को इस संबंध में कड़ी नजर रखने और सख्त कार्यवाही सुनिश्चित करने के लिए कहा है। इस बार सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि आदेशों का पालन न होने पर संबंधित विभागों के प्रमुखों पर भी कार्रवाई की जा सकती है।
