



मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहलोत सरकार द्वारा नए जिले बनाने के फैसले पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सोच-समझकर ऐसे निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने गहलोत सरकार पर तंज कसते हुए कहा, "पिछली सरकार ने अति कर दी थी। जहां आवश्यकता हो, वहीं कार्यालय खुलने चाहिए। एक जिले को बनाने में काफी धन और संसाधन लगते हैं। क्या इस पर विचार नहीं करना चाहिए?"
सीएम भजनलाल शर्मा ने गहलोत सरकार की बिजली उत्पादन नीतियों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा, "पिछली सरकार ने पांच सालों में बिजली के क्षेत्र में कोई काम नहीं किया और न ही एक भी यूनिट बिजली पैदा की।" इसके विपरीत, उन्होंने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए बताया कि उनकी सरकार ने 2 लाख 24 हजार करोड़ के बिजली एमओयू किए हैं और आने वाले दो सालों में राजस्थान बिजली निर्यात करने वाला राज्य बनने वाला है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह बयान राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद् (आरएएस एसोसिएशन) के शपथ ग्रहण समारोह में दिया। उन्होंने इस दौरान अपने दृढ़ संकल्प और इच्छा शक्ति की बात करते हुए कहा, "जो मन से काम करता है, ऊपरवाला भी उसका साथ देता है।" उन्होंने राजस्थान के बांधों का जिक्र करते हुए बताया कि इस साल अधिकांश बांधों के गेट तीन-तीन, चार-चार बार खोलने पड़े हैं, और अब सरकार ऐसे पानी को भी काम में लाने की व्यवस्था करने जा रही है, जो व्यर्थ में बहकर बाहर चला जाता है।
इस बयान के साथ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने गहलोत सरकार के फैसलों की आलोचना करते हुए अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया।

राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद् (आरएएस एसोसिएशन) के शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अधिकारियों को ईमानदारी और नैतिकता का महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने एक भावुक घटना का उल्लेख किया, जिसमें एक बुजुर्ग दंपति ने अपनी समस्या लेकर उनसे मुलाकात की थी।
सीएम भजनलाल शर्मा ने बताया, "एक बार एक बुजुर्ग दंपति मेरे पास आए और कहा, 'सीएम साहब, हमारी बात सुनो।' जब मैंने उनसे उनकी समस्या पूछी, तो उन्होंने कहा कि उनके बच्चों ने उन्हें उनके घर से निकाल दिया है। वह बड़े पद से रिटायर्ड हो चुके थे, लेकिन मैं उनका नाम नहीं बताऊंगा।"
बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री को बताया कि उन्होंने पांच मकान बनाए थे। उनके एक बेटे ने दो मकान बेच दिए, दूसरे बेटे ने तीसरा मकान बेच दिया, चौथे मकान में बेटा खुद रह रहा था, और पांचवां मकान किराए पर दे रखा था।
बुजुर्ग की कहानी सुनने के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने उन्हें एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने कहा, "मैंने उनसे पूछा कि तुमने कितना पैसा कमाया। उसी का परिणाम है कि तुम्हें आज इस स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। जैसा करोगे, वैसा ही भरना पड़ेगा।
राजस्थान प्रशासनिक सेवा परिषद् (आरएएस एसोसिएशन) के शपथ ग्रहण समारोह में शनिवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नव नियुक्त अध्यक्ष महावीर खराड़ी को शपथ दिलाई। इस महत्वपूर्ण मौके पर महावीर खराड़ी ने आरएएस अधिकारियों की प्रमुख मांगों को मुख्यमंत्री के सामने रखा और अधिकारियों की समस्याओं को उजागर किया।
महावीर खराड़ी ने अपने संबोधन में कहा कि आरएएस अधिकारी सरकार के "आंख, नाक और कान" हैं, और उपखंड अधिकारी जनता और प्रशासन के बीच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं। लेकिन वर्तमान में उपखंडों की संख्या तेजी से बढ़ने के बावजूद, अधिकारियों के लिए आवश्यक संसाधनों में बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि कई अधिकारियों के पास न तो अच्छा ऑफिस है, न आवास और न ही सरकारी गाड़ी।
खराड़ी ने आरएएस अधिकारियों के प्रमोशन में आ रही दिक्कतों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि प्रमोशन के लिए कई राइडर्स (शर्तें) लगे हुए हैं, जिनके कारण पद खाली होने पर भी अधिकारियों का समय पर प्रमोशन नहीं हो पाता है। इसके अलावा, उन्होंने एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) भरने पर लगी रोक का मुद्दा उठाया और बताया कि यह भी प्रमोशन में अड़चन पैदा कर रहा है।
खराड़ी ने यह भी उल्लेख किया कि कई महत्वपूर्ण विभागों जैसे परिवहन और आबकारी में आरएएस अधिकारियों के पद समाप्त किए जा रहे हैं, जिससे अधिकारियों को चिंता हो रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से इन समस्याओं को हल करने की अपील की, ताकि आरएएस अधिकारियों को उनके कार्यों को प्रभावी ढंग से करने के लिए आवश्यक संसाधन और समर्थन मिल सके।
इस समारोह के माध्यम से महावीर खराड़ी ने आरएएस अधिकारियों की चुनौतियों और उनकी आवश्यकताओं को सीएम भजनलाल शर्मा के सामने प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया, जिससे इन मुद्दों पर सरकार का ध्यान आकर्षित हो सके।