



हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर के खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की याचिका पर अब 2 सप्ताह बाद सुनवाई होगी। हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर की ओर से उनके अधिवक्ता दीपक चौहान ने हाईकोर्ट से बहस के लिए समय मांगा है। चौहान ने कोर्ट में कहा कि एसीबी ने चालान पेश कर दिया है और उन्होंने इस संबंध में दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश किए हैं, इसलिए उन्हें बहस की तैयारी के लिए और समय चाहिए।
एसीबी ने 19 सितंबर को हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में चालान पेश किया था। इसके बाद उन पर निलंबन का खतरा मंडराने लगा है। अगर आज कोर्ट से हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर को राहत मिल जाती, तो सरकार के लिए उन्हें निलंबित करना मुश्किल हो सकता था। लेकिन आज अदालत में समय मांगने का निर्णय चर्चा का विषय बन गया है।
याचिका में मुनेश के अधिवक्ता ने कहा था कि एसीबी हेरिटेज नगर निगम की मेयर मुनेश गुर्जर से रिश्वत की डिमांड साबित करने में असफल रही है। एसीबी ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि मेयर ने शिकायतकर्ता से कैसे डिमांड की और इसका सत्यापन कैसे हुआ। साथ ही, मुनेश गुर्जर से कोई रिकवरी भी नहीं हुई है।
अधिवक्ता दीपक चौहान ने यह तर्क भी दिया कि एफआईआर में मेयर की भूमिका को लेकर कोई ठोस सबूत नहीं हैं। इसलिए, यह एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) के तहत आवश्यक दो प्रमुख शर्तें, डिमांड और रिकवरी, को सत्यापित नहीं करती है।
याचिका में कहा गया कि पूर्व में दर्ज किए गए मामले में भी पुलिस ने मेयर के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं पाए थे। अगर ऐसे सबूत होते तो उसी समय कार्रवाई की जाती। वकील का दावा है कि मेयर मुनेश को इस मामले में जानबूझकर फंसाया गया है और उनका इस मामले से कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
याचिका में राज्य सरकार, शिकायतकर्ता, और सुधांशु सिंह को पक्षकार बनाया गया है। इस मामले पर अब आगामी दिनों में सुनवाई होगी, जिसके बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि मेयर मुनेश को राहत मिलेगी या नहीं।