



एक्यूप्रेशर सेवा समिति जयपुर द्वारा आयुर्वेद मर्म चिकित्सा की 43 वीं सेमिनार का आयोजन किया गया। आयुर्वेद मर्म चिकित्सा के 107 मर्म केंद्रों का उपयोग करके शरीर की बाधित ऊर्जा को संतुलित करने के लिए हल्की संवेदना की जाती है। यह प्राचीन चिकित्सा प्रणाली शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने में मदद करती है।
आयुर्वेद मर्म चिकित्सा रविवार को आयोजित कार्यशाला में कुरुक्षेत्र विश्व विद्यालय के प्रोफेसर डॉ. पी सी मंगल और वरिष्ठ आयुर्वेद विद्वान डॉ. एस एन शर्मा , डॉ. शिव शंकर गौड़ ने सभी लोगों को आयुर्वेद की दिनचर्या का पाठ पढ़ाया। आयुर्वेद मर्म चिकित्सा की कार्यशाला में मुख्य अतिथि बड़ौदा के आयकर विभाग की आयुक्त जेके मीणा थे, अध्यक्ष एक्यूप्रेशर सेवा समिति डॉ.पीयूष त्रिवेदी आयुर्वेद मर्म चिकित्सक ने सभी मर्म चिकित्सा सीखने आए आगुंतकों का स्वागत किया।