



राजस्थान विधानसभा में 29 जुलाई सोमवार को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा बजट पारित होने से पहले सरकार की ओर से जवाब प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री शर्मा कई नई घोषणाएं भी करेंगे। ईस्टर्न कैनाल परियोजना को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय परियोजना में शामिल करने का ऐलान करने के साथ ही जयपुर जोधपुर और कोटा नगर निगम दो की जगह एक करने और यमुना जल समझौते को लेकर भी अपनी बात रख सकते हैं, वन स्टेट वन इलेक्शन और नए जिलों के बारे में सरकार निर्णय के बारे में जानकारी दी जा सकती है !
प्रतिपक्ष नेता टीकाराम जूली बजट बहस पर विपक्ष की ओर से अपना पक्ष रखेंगे। वे यमुना जल समझौते को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण देने और ईस्टर्न कैनाल परियोजना के बारे में सवाल पूछेंगे कि सरकार के एमओयू में क्या कुछ है और केंद्र सरकार ने भजनलाल सरकारकी महत्वपूर्ण परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना में दायरे में ले लिया है या नहीं ! इसके अलावा वन स्टेट वन इलेक्शन के बारे में सरकार क्या कुछ सोच रही है !
विधानसभा में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने बजट प्रस्तुत किया था और उन्होंने पहली बहस का सरकार की ओर से जवाब देते हुए कई घोषणाएं की थी। अब सवाल यह उठता है कि आखिर मुख्यमंत्री शर्मा को बजट बहस का अंतिम जवाब और घोषणाओं का श्रेय अपने नाम क्यों करना चाहते हैं ! क्या वित्त मंत्री के रूप में उपमुख्यमंत्री को इस अधिकार से क्यों वंचित करना चाहते हैं ! मुख्यमंत्री तो सदन का नेता होते है वह कभी भी हस्तक्षेप कर सकते है। लेकिन जब सदन में मंत्री विपक्ष के जवानों का सही तरीके से जवाब नहीं दे पते है तो मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करके उनका बचाव करना पड़ता है। अब यहां सवाल यही उठता है कि उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी सदन में अपना जवाब प्रस्तुत करने में सक्षम नहीं है क्या ऐसे में मुख्यमंत्री को कमान संभालने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। चर्चाएं कई है पर विधानसभा के जवाब के बाद भविष्य की राजनीति के बारे में स्पष्टता आएगी।
मुख्यमंत्री शर्मा हाल ही में नीति आयोग की बैठक में शामिल होकर आए हैंऔर उसमें क्या कुछ प्रदेश को मिला है उसकी स्पष्टता भी सामने आएगी।आप चाहे कुछ भी कहो लेकिन सदन के नेता मुख्यमंत्री शर्मा का विधानसभा में बजट पारित होने से पहले किन-किन घोषणाओं का पिटारा खुलेगा और उसका राजनीतिक संदेश क्या कुछ जाएगा यह तो आज सामने आएगा।

मुख्यमंत्री शर्मा इस बात से उत्साहित हैं कि उन्होंने संगठन में अपने तौर तरीके से फेरबदल कर लिया है और अब वे प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव करकेअपने राजनीतिक कौशल का प्रदर्शन करने की तैयारी में जुटे हैं। विधानसभा के होने वाले पांच उपचुनाव निश्चित तौर पर नई चुनौती है उसमें कितनी सफलता मिलेगी यह तो चुनाव परिणाम ही बता पाएंगे।
भाजपा के नवनियुक्त अध्यक्ष मदन राठौड़ से मुख्यमंत्री शर्मा और दोनों उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बेरवा की मुलाकात से स्पष्ट होने लगा है कि सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है, चलो जो कुछ है वह सामने आएगा ! राजनीतिक परिपेक्ष में भविष्य का संदेश देने के लिए मिलने मिलाने का सिलसिला जारी है और अब आने वाले समय में नए प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ भी अपना कार्यभार संभालेंगे और पार्टी की नई चुनौतियां का सामना करने के लिए अपनी रणनीति बनाकर आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे। चित्तौड़ के सांसद सीपी जोशी ने इस स्थिति की पेशकश कर का अपने राजनीतिक त्याग का बड़ा उदाहरण दिया हैऔर अब केंद्रीय नेतृत्व उन्हें राष्ट्रीय स्तर जिम्मेदारीदे सकता है !