



राजस्थान की विख्यात गायिका दीपशिखा जैन ने नेट थिएट पर अपनी मधुर आवाज में लोकगीत एवं भजन के स्वर छेड़े तो बादल गरज उठे और सावन की फुहारों से संगीत रसिको को मंत्रमुग्ध किया। नेट थियेट के राजेंद्र शर्मा राजू ने बताया की दीपशिखा ने टूटे बाजूबंद री लूम लड़ उलझी उलझी जाए को सुनाकर राजस्थानी संस्कृति के रंग बिखरे। इसके बाद राजस्थान के प्रसिद्ध लोकगीत इन लहरिये रा नौ सौ रुपिया रोकड़ा और म्हारी दोरानिया जेठानिया रूठ गी रे म्हारा सासु जी मनवा ना आय बनी सा रुस गी रे झट चौमासो लागयो रे साथ ही खड़ी नीम के नीचे में तो एक ली गीत गाया तो सावन की फुहारो का आनंद मन को प्रफुल्लित कर गया। इसके बाद दीपशिखा ने अपने मधुर कंठ से भजन आज वृंदावन रास रचो है मैं भी देखने जाऊंगी और थाने काई काई कह समझावां म्हारा सांवरा गिरधारी सुना कर भगवान को रिझाया । सीमा मिश्रा के साथ तबले पर नवल डांगी ने अपने उंगलियों का ऐसा जादू बिखेरा की लौग वाह वाह कर उठे। सिंथेसाइजर पर पवन बालोदिया और गिटार पर गौरव भट्ट ने सरदार संगतकर कार्यक्रम को परवान चढ़ाया। कार्यक्रम में कैमरा मनोज स्वामी, संगीत विनोद सागर गढ़वाल और मंच सज्जा अंकित शर्मा नोनू, वीरेंद्र सिंह राठौड़ और जिवतेश शर्मा की रही ।