Saturday, 29 August 2026

शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का 82 वाँ प्रकट महोत्सव राष्ट्रोत्कर्ष दिवस के रूप में मनाया, निकली शोभा यात्रा


शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का 82 वाँ प्रकट महोत्सव राष्ट्रोत्कर्ष दिवस के रूप में मनाया, निकली शोभा यात्रा

स्वामी निश्चलानंद सरस्वती का 82 वाँ प्रकट महोत्सव  के अवसर पर गुरुवार को  7:00 बजे राम गोपेश्वर महादेव मंदिर परमहंस मार्ग से 3100 महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा मानसरोवर स्थित गोपेश्वर मंदिर परमहंस मार्ग से निकल गई। इस भव्य शोभायात्रा पटेल मार्ग से होती हुई शिप्रा पथस्थित कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। शोभा यात्रा में हाथी घोड़े बैंड बाजे पांच रथ शामिल हुए।शोभा यात्रा काश्रद्धालुओं ने जगह-जगह पर फूल बरसाकर स्वागत किया। शोभायात्रा मेंकृषि मंत्री डॉ. करोड़ी लाल मीणा ने भी घोड़ी नृत्य कियाऔर शोभायात्रा में पैदल चलकर शोभा बढ़ाई। 

आदिगुरु शंकराचार्य भगवान् वर्तमान पुरी पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती महाराज जयपुर के आराध्य देव गोविंद देव जी ,गौ माता की झांकी ,भगवान जगन्नाथ जी के साथ बलराम जी एवं सुभद्रा का रहा,के जगन्नाथ जी के रथ को  रस्से के माध्यम से व्यक्तियों द्वारा पुरी जगन्नाथ की तरह खींचा गया जो जयपुर में पहली बार शंकराचार्य की उपस्थिति मे हुआ ,कार्यक्रम स्थल पर हनुमान चालीसा पाठ से गूंज उठा ।

भव्य भारत और हिंदू राष्ट्र बनाने का संकल्प लेना होगा हर हिंदू को:  स्वामी निश्चलानंद सरस्वती

जगद्गुरु शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती  ने कहा कि भारत हिंदू राष्ट्र है और रहेगा यह घोषित किया क्योंकि शंकराचार्य का दायित्व शासको पर शासन सरकारों पर शासन करने का होता है आदिकाल से यह परंपरा हमारे देश में रही है । 

उन्होंने कहा कि धर्म के अधीन रहकर ही राजनीति रही है जैसे भगवान रामचंद्र वशिष्ठ ऋषि  और कलिकाल में चाणक्य के सानिध्य में चंद्रगुप्त ने राज्य किया छत्रपति शिवाजी महाराज ने समर्थ गुरु रामदास के सानिध्य में राज्य शासन चलाया इस तरह शंकराचार्य सभी शासको से ऊपर है। 

शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि मुगल व  अंग्रेजों की बर्बर कूटनीति के माध्यम से देश की सभ्यता और संस्कृति का नाश किया गया। यह तथ्य सर्व विदित है की हमारे सबके पूर्वज आर्य हिंदू वेदिक सनातनी है । मुसलमान के भी पूर्वज आर्य हिंदू वेदिक सनातनी है गुलाम नबी आजाद ने भी कहा था हमारे पूर्वज कश्मीर पण्डित थे, ईसाइयों के भी पूर्वज आर्य हिंदू वेदिक सनातनी है । शंकराचार्य ने आगे कहा कि इतिहास को साक्षी मानकर मुस्लिम तंत्र , ईसाई तंत्र और भी जो तंत्र है वह अपने आप को हिंदू कहकर शालीनता का परिचय दे और अपने आप को गौरवान्वित महसूस करें।  

शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती  ने कहा कि विधर्मियों ने अत्याचार करके हमारी सभ्यता  संस्कृति को नष्ट किया हमारे वर्ण आश्रम धर्म पर बहुत कुठाराघात किया। आज विश्व को कोई अगर दिशा देने में समर्थ है तो वह सनातन धर्म ही है। हमारे वर्ण  आश्रम धर्म के अंदर सभी मनुष्यों की आजीविका उनके जन्म से सुरक्षित है सारे कुटीर उद्योग लघु उद्योग  सेवा के प्रकल्प अर्थात आर्थिक उद्यमिता के संस्थान शूद्र वर्ण  के हाथ में ही रहा है और ब्राह्मण वर्ण ज्ञान का उपदेश देता रहा है ऋषि मुनि वैज्ञानिक दार्शनिक व्यावहारिक तरीकों से सिद्धांतों की स्थापना करने के लिए पैदा हुए थे और क्षत्रिय देश की सीमाओं को सुरक्षित करने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे और वैश्य वर्ग भी व्यापार एवं विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से व्यापार तंत्र को मजबूत रखते हुए सभी वर्णों की सेवा में तत्पर रहते थे कालांतर में विसंगतियां हुई जिसके कारण आज भारत ही नहीं अपितु पूरा विश्व भी इस दंश  को झेल रहा है कि वैकल्पिक वर्ण व्यवस्था अपनानी पड़ रही है।

शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि आज अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस इत्यादि देशों ने हमारे पूर्वजों के संविधान मनुस्मृति को आधार मानते हुए ही वैकल्पिक वर्णों की व्यवस्था की,  प्रशासक, सैनिक , मैनेजर, वर्कर्स जैसे वर्गों का प्रशिक्षण के माध्यम से  समाज संगठन की सरचना की  इस वैकल्पिक वर्ण व्यवस्था का दुष्परिणाम यह है कि इसमें समय संपत्ति व सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग होता है जबकि हमारे सनातन सिद्धांत को पूरा विश्व अगर स्वीकार कर ले तो लोक और परलोक दोनों सिद्ध हो जाए बस हम सब को समझने की आवश्यकता है। मनुष्य अपने पद का उपभोक्ता न बने अपने दायित्व का निर्वहन करे तो पतन की संभावना नहीं रहती है क्योंकि सनातन धर्म में फलचाह नही है।

शूद्र शब्द हीनता का प्रतीक नही है ये एक पवित्र शब्द है जो वर्ण व्यवस्था का आवश्क अंग है। शंकराचार्य गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर स्वामी निश्चलानंद सरस्वती  ने कहा कि विश्व में ऐसी कौन सी व्यवस्था है जिसके अंतर्गत बिना गर्भपात किया जनसंख्या नियोजन रहे बिना पर्यावरण प्रकृति को नुकसान पहुंचा व्यापार के सेवा के रक्षा के चिकित्सा के प्रकल्प सुरक्षित रहे केवल और केवल सनातन हिंदू आर्य वैदिक धर्म ही एकमात्र धर्म है जिससे मनुष्य का सर्वाधिक उत्कर्ष सुनिश्चित है आज विकास के नाम पर विनाश ही हो रहा है महायंत्रों का प्रचुर आविष्कार अभिशाप सिद्ध हो रहा है गौ माता, गंगा का विनाश हो रहा है मर्यादा तार तार  हो रही है इन्हीं सबसे पार पाने का अब विश्व को दिशा देने का  एकमात्र विकल्प सनातन धर्म ही अपेक्षित है। 

आयोजक धर्म संघ पीठ परिषद आदित्य वाहिनी आनंद वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष गोपाल शर्मा प्रदेश महामंत्री अनिल सरपंच, डॉ. मेघेद्र, मुकेश भारद्वाज कृष्णा सिंघल धर्मेंद्र गोयल सहित सभी मौजूद रहे।मीडिया प्रभारी मुकेश भारद्वाज ने बताया कि डॉ. किरोडीलाल,पूर्व सांसद रामचरण बोहरा एवं विधायक बालमुकुन्दाचार्य ने शंकराचार्य महाराज से भेंट कर आशीर्वाद लिया।

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