Saturday, 29 August 2026

बीसलपुर बांध बुझा रहा कई जिलों की प्यास,मानसून से टिकी हैं बांध के लबालब होने की उम्मीद


बीसलपुर बांध बुझा रहा कई जिलों की प्यास,मानसून से टिकी हैं बांध के लबालब होने की उम्मीद

जयपुर,अजमेर, टोंक,ब्यावर और दूदू पांच जिलों की प्यास बुझााने वाले बीसलपुर बांध में अब मानसून तक का ही पानी शेष बचा है। अब बीसलपुर बांध को भी अच्छे मानसून की उम्मीद है क्योंकि वही बांध के अस्त्तिव के तय करेगा। 

टोंक जिले के बीसलपुर बांध का जलस्तर रविवार  को 309.93 आरएल मीटर दर्ज किया गया है जिसमें 10.612 टीएमसी पानी है। यह बांध न सिर्फ राज्य की राजधानी जयपुर बल्कि  अजमेर ,टोंक जिले सहित कई जिलों के लाखों लोगों की प्यास बुझा रहा है लेकिन अब मानसून तक का ही पानी शेष होने से लोगों की चिंता बढ़ रही है। वर्तमान गर्मी में बढते पानी के दबाव के कारण लोगों की उम्मीदों के खरा उतरने के लिए बीसलपुर बांध्ी सांसे फूलने लगी है।  

बीसलपुर बांध से एक ओर  जयपुर, अजमेर, टोंक, दौसा को भीषण गर्मी में पेयजल संकट के बीच लगातार पेयजल की सप्लाई साथ ही भीषण गर्मी की वजह से वाष्पीकरण का सीधा -सीधा प्रभाव बीसलपुर बांध के लगातार घटते जलस्तर में दिखाई दे रहा है।

वहीं दूसरी तरफ बीसलपुर बांध जलसंग्रहण क्षेत्र में बांध में बह करके आई मिट्टी और गाद के कारण उपलब्ध पानी की मात्रा कम हो सकती है। बांध से मई महीने में गर्मी के चलते 1.068 टीएमसी पानी का वाष्पीकरण हुआ है।  जिसके मुताबिक अनुमानित प्रतिवर्ष इस बांध से वाष्पीकरण तथा पानी चोरी के रूप 3 से 4 टीएमसी के बीच जाता है। फिलहाल बांध में भले ही इस मानसून तक के लिए पेयजल के लिए पर्याप्त पानी हो, लेकिन चिंता इस बात की है कि राजस्थान में मानसून इस बार कितना प्रभावी होगा जिससे की बांध में पानी की आपूर्ति हो सकेगी।

बीसलपुर बांध से वर्तमान में  जयपुर, अजमेर और टोंक को पेयजल आपूर्ति में 1000 एम एल डी पानी दिया जा रहा है जिससे बांध का जल स्तर प्रतिदिन करीबन 2 सेमी कम हो रहा है। बांध से जयपुर को 650 एमएलडी, अजमेर को 300 एमएलडी और टोंक को 50 एमएलडी पानी पेयजल के लिए रोजाना दिया जा रहा है।यदि पिछले 16 दिनों की तुलनात्मक पानी की आपुर्ति के देखा जाए तो 27 मई से लेकर 13 जून तक बांध में कुल 39 सेंटीमीटर पानी कम हुआ है। 27 मई को बांध का जलस्तर 310.36 आरएल मीटर था वहीं 27 मई को बांध में कुल 11.789 टीएमसी पानी मौजूद था जो कि पिछले 16 दिनों 1.43 टीएमसी पानी कम हुआ है। बांध का जलस्तर का लगातार कम ह होना राजधानी जयपुर सहित कई जिलों के लाखों लोगों के लिए चिंता की बात है, ऐसे में सबकी उम्मीदें प्रदेश में अच्छे और जल्दी मानसून के प्रवेश के साथ ही बांध के जलग्रहण क्षेत्रो राजसमंद,चित्तौड़गढ़,भीलवाड़ा व प्रतापगढ़ जिलो में अच्छी बरसात के लेकरह टिकी हुई है।

बीसलपुर बांध निर्माण के बाद से अब तक 6 बार  बांध के गेट खोलकर ओवरफलो  पानी की निकासी की गई है। बांध बनने के बाद पहली बार 2004 में बीसलपुर बांध लबालब भरा था और इसके गेट खोलकर पानी की निकासी की गई, उसके बाद दूसरी बार 2006 में बांध से 43 टीएमसी पानी की निकासी की गई, तीसरी बार 2014 में बांध से 11 टीएमसी पानी की निकासी की गई,चैथी बार 2016 में गेट खोलकर 93 टीएमसी पानी की निकासी की गई थी। बीसलपुर बांध के 21 साल के इतिहास में सबसे ज्यादा 135 टीएमसी की निकासी 2019 में की गई और अब तक 2019 में ही एक साथ बांध के सभी 18 गेटों को खोलकर पानी की निकासी की गई थी, इसके बाद 2022 में बांध से छठी बार गेट खोलकर पानी की निकासी की गई थी। जिसमें राजस्थान में 2020 में लगे पहले स्काडा सिस्टम (कंप्यूटराइज्ड तरीके से) इसका प्रयोग किया गया था।

बीसलपुर बांध टोंक जिले में बीसलपुर गांव के पास बनास नदी के दो पहाड़ो के बीच बना बांध है, जिसमें कुल 18 गेट है। इस बांध का शिलान्यास 1985 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवचरण माथुर ने किया था, इस बांध को बनने में 14 साल का समय लगा और 1999 में बांध बनकर तैयार हुआ। यह बांध बनने के 5 साल बाद पहली बार 2004 में यह बांध पूरी तरह से भरा तथा बांध के गेट खोलकर पानी की पहली बार निकासी की गई। बांध का कुल जलभराव 315.50 आर एल मीटर है, जिसमें कुल 38.708 टीएमसी पानी का भराव होता है। बीसलपुर बांध का कैचमेंट एरिया छह जिलों में हैं जिसमें भीलवाड़ा का 51 प्रतिशत, चित्तौड़गढ़ का 17, उदयपुर का 6, अजमेर का 15, टोंक का 2 और प्रतापगढ़ का 1 प्रतिशत क्षेत्र है। चित्तौड़गढ़ में गम्भीरी डैम से पानी की निकासी के बाद उसका पानी भी बीसलपुर बांध में बहकर आता है, वह गम्भीरी डेम में पानी की आवक मध्यप्रदेश से होती है।

बीसलपुर बांध के अधिशासी अभियन्ता मनीष बंसल ने बताया कि वर्तमान में मानसून तक के लिए बांध में पेयजल आपूर्ति के लिए पर्याप्त पानी मौजूद है,लेकिन निरन्तर आपूर्ति के लिए मानसून का जल्दी आना और अच्छे मानसून की बरसात जरूरी है। मानसून पूर्व बांध के मुख्य गेट के आगे स्टोपलॉक गेट लगाकर मुख्य गेट को ऊपर करके उस में रबड़ सील की जांच की जाती है और गेट के तारों के रस्से और अन्य उपकरणों में ऑयल और ग्रिसिग की जाती हैं तथा इलेक्टिकल चेकिंग का कार्य कर लिया गया है। इस मानसून सत्र में 15 जून से बांध के तीन बाढ़ नियंत्रण सूचना केन्द्र स्थापित किए गए है जो मांडलगढ़ के पास त्रिवेणी ,दूसरा देवली और तीसरा बीसलपुर बांध स्थल में होगा जो 24 घंटे कार्यरत रहेंगे।

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