Saturday, 29 August 2026

सन टू ह्यूमन फाउंडेशन का 6 द्विवसीय नया दृष्टिकोण वाला योग शिविर संपन्न, दाएँ ब्रेन को विकसित करने से होगा दिव्य दृष्टी का विकास और स्थाई लाभ पाने के लिए करना होगा निरंतर प्रयास


सन टू ह्यूमन फाउंडेशन का 6 द्विवसीय नया दृष्टिकोण वाला योग शिविर संपन्न, दाएँ ब्रेन को विकसित करने से होगा दिव्य दृष्टी का विकास और स्थाई लाभ पाने के लिए करना होगा निरंतर प्रयास

नया दृष्टिकोण वाला 6 द्विवसीय शिविर भवानी निकेतन, सीकर रोड जयपुर में सन टू ह्यूमन फाउंडेशन के तत्वाधान  2 जून 2024 को संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि परम आलय एवं मुख्य प्रशिक्षक गार्गी माँ  सेजवानी जिला धार मध्य प्रदेश से कार्यक्रम में शामिल हुए। इसमें प्रत्येक दिन भारतवर्ष के विभिन्न प्रदेशों के आये 15 हजार से ज्यादा लोगो द्वारा भाग लिया। अंतररास्ट्रीय ख्याति प्राप्त योग, प्राकृतिक चिकित्सा एवं अल्टरनेटिव थेरेपी विशेषज्ञ ओम प्रकाश ने यह जानकारी ने दी।

परम आलय ने कहा कि बढती सुविधाओं एवं विकास  के कारण अहंकार, काम क्रोध,लोभ, मोह बढ़ रहा है अतः इससे मनुष्य के जीवन में अशांति बढती जा रही है. आज का युवा लक्ष्य से भटककर अपनी शक्तियों का  दुरूपयोग कर जीवन बर्बाद कर रहा है। माता पिता भी अपने बच्चो को सही दिशा नहीं दिखा पा रहे है बस पैसे, जमीन जायदाद, महँगी गाड़ी एवं अन्य सुख सुविधाओं के पीछे भागते जा रहे है और बच्चो को भी इनके पीछे धकेल रहे है। स्वयं को जानकर एवं विकसित कर के ही अपने बच्चो एवं समाज को सही दिशा दी जा सकती है। उन्होंने अद्रश्य शक्तियों को जगाने के लिए विभिन्न नियमो,सूत्रों एवं प्रयोगों  के बारे में जानकारी प्रदान की। बायाँ ब्रेन दूर दृष्टी को बढ़ाता है जबकि दायाँ ब्रेन दिव्य दृष्टी को बढाता है। तामसिक प्रकृति होने के कारण मूली,गाजर,लाल मिर्च,भिन्डी बैगन, ज्वार,दूध,प्रोसेस्ड एवं डिब्बाबंद एवं बासी खाध पदार्थो आदि का सेवन न करने की सलाह देते हुए कहा की इनके लेने से चेतना के विस्तार में रुकावट आती है अतः इनके इस्तेमाल से बचना चाहिए और सात्विक भोजन को ही प्राथमिकता देनी चाहिए। हर रोज सोने से पूर्व अपने बिस्तर को सातो अंगो से प्रणाम करना चाहिए तथा सुबह उढ़कर भी नमन करकर बिस्तर एवं तकिया की तहों को ठीक कर देना चाहिए। नियमित तौर पर नाभी झटका प्रयोग एवं मुह को बंदकर आँखों से नाक को बिना पलक झपकाए निहारना चाहिए। यदि शाम को खाने के डेढ़ घंटे बाद सीधे हाथ की हथेलियों को बाएं फेफड़ों एवं कंधो के पास रखकर उलटे हाथ के हथेलियों को दाएँ फेफड़ों एवं कन्धों के पास रखकर 7 मिनट उल्टा घुमा जाए तो इससे शरीर के सभी अंग मजबूत होते है और गहरी नींद आती है।           

शिविर में विभिन्न लोगो द्वारा हाई ब्लड प्रेशर, डिप्रेशन, अनिद्रा, डायबिटीज, मोटापा, माइग्रेन, थायराइड, अर्थरइटिस, कब्ज, एसिडिटी, कमजोरी, सर्वाइकल, कमर दर्द, घुटना दर्द, पिंडलियों का दर्द, एड़ी का दर्द, फेफड़ों एवं ह्रदय सम्बंधित विभिन्न अन्य  समस्याओं  में प्राप्त हुए लाभों के अनुभवों बारे में  बताया. इसके अलावा  गलत आदतों जैसे चाय, काफी, शराब, मांस का सेवन, फ़ास्ट फ़ूड, देर रात तक जगना और सुबह देर से उठना के  छुटकारे के साथ, अद्रश्य शक्तियों वाले नास्ते एवं सात्विक भोजन को अपनाने से  शरीर, मन, बुद्धि  एवं चेतना के स्तर में हुए आमूलचूल आये परिवर्तनों के बारे में भी अपने अपने अनुभवों को साझा किया। 

शिविर में आध्यात्मिक, मानसिक एवं शार्रीरिक ऊर्जाओं का संचार योग, प्राणायाम, व्यायाम, ध्यान, म्यूजिक, लार के श्राव की अनुभूति, नृत्य, पञ्च तत्वों का संतुलन, स्पर्श चिकित्सा, मैग्नेटिक उर्जा, सुजोक, एक्यूप्रेशर, डाइट  आदि के अद्भुत संगम के माध्यम से किया गया. लोगो द्वारा मस्ती में झूमते हुए सुख, आनंद  और ऊर्जाओं को महसूस  किया। 

माँ गार्गी द्वारा विभिन्न अनुभूत प्रयोगों के विज्ञान के बारे में पहले विस्तार से बताया गया फिर उनका प्रैक्टिकल करवाया गया। इन प्रयोगों को  करने एवं खानपान में आवश्यक परिवर्तन  से विभिन्न प्रकार की बीमारियाँ में आराम मिलता है तथा इनके लगातार करने से सभी प्रकार के शारीरिक एवं मानसिक रोगों से छुटकारा भी मिल सकता है। शरीर, मन, बुद्धि एवं चेतना  की शक्तियों को जगाने के लिए साधना के सतत धारा है जरुरी। पूर्ण स्वास्थ्य लाभ पाने के लिए भोजन करने से पूर्व उसकी प्रार्थना अवश्य करनी चाहिए। सुबह स्नान कर घर के सभी सदस्यों को मुस्कराकर प्रणाम एवं चन्दन केसर से टीका अवश्य किया जाना चाहिए।

शिविर के अंत में प्रत्येक दिन सभी लोगो के लिए अद्रश्य शक्तियों वाला ब्रेकफास्ट का आयोजन किया गया जिसमे फलों में  केला, सेब, लीची, मौसंबी गन्ना,,नारियल सब्जियों में करेला चटनी,लौकी,आँवला सीड्स एवं सूखे मेवे में   बादाम, अखरोट, सौफ, मेथी, अलसी, तिल चटनी, सूरजमुखी के बीज  तथा   पतली छाज,एनर्जी टी एवं गुड पानी को शामिल किया गया था। इस नास्ते को  बनाने की जानकारी युटयूब चैनल स्वमिलन साधना के माध्यम से सीधे प्राप्त की जा सकती है तथा विद्याधर नगर स्थित मुख्य केंद्र के माध्यम से भी नास्ता,  लंच एवं डिनर बनाने की निशुल्क जानकारी ऑनलाइन एवं ऑफलाइन प्राप्त की जा सकती है।  

कार्यक्रम के आयोजन में अन्य लोगो, प्राइवेट एवं सरकारी संस्थाओं तथा स्वयं सेवी संगठनों के साथ साथ परम आनंद, अम्बरीष,नरेंद्र वैद,आई.सी.अग्रवाल,विवेक लड्ढा, राजेश नागौरी, प्रमोद मालपानी, कमल सोमानी, आलोक तिजारिया, नारायण अग्रवाल, राजेंदर अग्रवाल, माँ सिमरन आदि का विशेष सहयोग रहा। इसके अलावा जून 2025  इसी तरह के शिविर को जयपुर में आयोजन करने के लिए विभिन्न गणमान्य लोगो ने सहयोग राशि प्रदान करने की घोषणा भी की।

जो लोग किसी कारण इस शिविर में भाग नहीं ले पाए वे जयपुर में सुबह निशुल्क चलाए जा रहे 21 केन्द्रों से संपर्क कर आवश्यक ज्ञान प्राप्त कर सकते है। इसके अलावा पुरे भारत के अन्य शहरों में हों वाले आगामी 6 दिन के  शिवरों में रजिस्ट्रेशन करा कर भाग ले सकते है। जो लोग विस्तृत रूप से इस सम्बन्ध में समझना एवं कदम बढ़ाना चाहते है वे सेजवानी जिला धार इंदौर के पास  मध्य प्रदेश में वर्ष में विभिन्न अवसरों पर आयोजित किये जाने वाले आवासीय शिविर में एडवांस में  अपना रजिस्ट्रेशन करवाकर भी जा सकते है।

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