


अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सचिन पायलट को कांग्रेस ने नेतृत्व ने छत्तीसगढ़ का लोकसभा चुनाव का प्रभारी बनाया था। उन्होंने छत्तीसगढ़ के चुनाव के साथ-साथ लोकसभा चुनाव के लिए राजस्थान सहित देशभर के विभिन्न लोकसभा चुनाव क्षेत्र में कांग्रेस पार्टी को वोट दिलाने और भाजपा कोचुनौती देने वाले नेता के रूप मेंछवि निखरकर सामने आई हैं।
देशभर से कांग्रेस उम्मीदवार अपने क्षेत्र में सचिन पायलट की चुनावी सभा करने की मांग कर रहे हैं। इसी मांग को देखते हुए कांग्रेस नेतृत्व ने पांचवें चरण के चुनाव तक उनका उपयोग 14 राज्य राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, असम, केरल, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, दिल्ली, उड़ीसा, हरियाणा में 51 लोकसभा सीटों में 98 जनसभाएं कराई गई है। सचिन पायलट ने राहुल गांधी के दोनों लोकसभा क्षेत्रों वायनाड और रायबरेली के चुनावी क्षेत्र में भी भेजा गया। केरल में राष्ट्रीय महासचिव कैसी वेणुगोपाल और शशि थरूर जैसे नेताओं लोकसभा क्षेत्र में भी सचिन की चुनावी सभा कराई गई। उड़ीसा में श्रीकांत जैना और हिसार में कुमारी शैलजा और फिल्म अभिनेता राज बब्बर ,मुंबई में वर्षा गायकवाड़ तथा दिल्ली में कन्हैया कुमार के लोकसभा क्षेत्र में भी सचिन पायलट की चुनावी सभा करने की मांग बनी रही।
कांग्रेस के तीनों वरिष्ठ नेताराहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बाद सचिन पायलट एकमात्र नेता हैं जिन्होंने भाजपा को लोकसभा के चुनाव में चुनौती देने का काम किया है। अब तक सचिन पायलट को राजस्थान के नेता के रूप में प्रचारित किया जाता रहा था लेकिन लोकसभा के चुनाव में उन्होंने केंद्रीय नेता के रूप में अपने आपको प्रभावी ढंग से भाजपा के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी करने वाला नेता भूमिका में उबर कर सामने आए हैं ।आप चाहे जो भी कुछ कहो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लोकसभा के चुनाव में अपने पुत्र वैभव गहलोत और अमेठी कांग्रेस को जितने तक ही सीमित रहे। अशोक गहलोत सचिन पायलट की बढ़ती प्रतिभा को देखते हुए उन्होंने लोकसभा चुनावके बीच में सचिन पायलट की छवि को खराब करने के लिए विभिन्न प्रकार के बयान जारी किए इन सबके बावजूद सचिन पायलट की मांग लोकसभा के चुनाव मेंबनी रही।
सचिन पायलट ने कांग्रेस प्रत्याशियों की स्थिति को मजबूत करने के लिए तूफानी चुनावी सभा की और छठे और साथ में चरण में भी उनकी चुनावी समय जारी है। लोकसभा चुनाव के बाद निश्चित तौर पर सचिन पायलट कांग्रेस में प्रभावशाली नेता के रूप के रूप में उभरकर के सामने आएंगे और केंद्रीय नेतृत्व के सामने उनकी राजनीति भूमिका और महत्वपूर्ण बनेगी। 4 जून के चुनावी परिणाम निश्चित तौर पर कांग्रेस के पक्ष में आने से पार्टी की स्थिति मजबूत बनाने में कामयाबी मिलेगी। जिसका श्रेय निश्चित तौर पर सचिन पायलट नेजैसे नेता को भी मिलेगा।