


इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह सहित भारत सरकार के अनेक मंत्री और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अलंकरण समारोह के बाद केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और अन्य केन्द्रीय मंत्रियों ने पद्म पुरस्कार विजेताओं के साथ गृह मंत्री द्वारा उनके आवास पर दिए गए रात्रि भोज के दौरान संवाद किया।
पद्म पुरस्कार विजेता कल सुबह (10 मई, 2024) को राष्ट्रीय समर स्मारक (National War Memorial) पर श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। वे राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री संग्रहालय का भी भ्रमण करेंगे।
अली मोहम्मद राजस्थान के लोक संगीत ‘मांड’ के एक प्रसिद्ध लोक गायक हैं। वह अपने भाई श्री गनी मोहम्मद के साथ गाते हैं और उनकी मधुर संगीत यात्रा लगभग 40 वर्ष से अनवरत चल रही है।
अली मोहम्मद का जन्म 15 जुलाई, 1960 को राजस्थान के बीकानेर जिले के एक गांव में हुआ। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता उस्ताद सिराजुद्दीन खान से ग्रहण की। मांड विशेष रूप से बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर में एक बहुत ही लोकप्रिय लोक गायन शैली है। उन्होंने अपने भाई के साथ न केवल इस लोक गायन शैली को पुनर्जीवित किया, बल्कि नई पीढ़ी को सिखाकर इसे बढ़ावा भी दिया।
अली मोहम्मद ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तथा रेडियो और टेलीविजन पर प्रस्तुति दी है। अब, वह और उनके भाई लोक गायन में मांड शैली के पर्याय बन गए हैं। उनके मांड गायन के कई संगीत एल्बम बाजार में उपलब्ध हैं। "केसरिया बालम”, "सुपनो", "मूमाल" और "कुइजन" राजस्थानी लोक गीत में उनके कुछ सबसे लोकप्रिय एल्बम हैं।
अली मोहम्मद और उनके भाई विभिन्न टी.वी. शो में निर्णायक के रूप मे भाग लिया है। उन्होंने भारतीय सिनेमा में संगीत निर्देशन किया है। अधिकांश आधुनिक फिल्मी गायकों ने उनके संगीत निर्देशन में गाया है। उन्होंने कई संगीत एल्बम जारी किए हैं जिनमें लता मंगेशकर, आशा भोसले, उदित नारायण, अलका याग्निक, ऋचा शर्मा, सुरेश वाडेकर, अनूप जलोटा, पंकज उधास, हंस राज हंस, अनुराधा पौडवाल, साधना सरगम जैसे गायकों ने गाया है। उनके गाए गीतों, भजनों, गजलों की संगीत जगत की महान हस्तियों ने मुक्त कंठ से सराहना की है। आज, वे दुनिया भर में अपने गायन का प्रदर्शन करते हैं और उनकी प्रत्येक प्रस्तुति में राजस्थानी लोक संगीत 'मांड' और रेत की खुशबू होती है।
अली मोहम्मद को संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2022 में राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें 2019-20 में अल्लाहजिला बाई पुरस्कार और 2022-23 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 2018 में बीकानेर (राजस्थान) जिला प्रशासन द्वारा भी सम्मानित किया गया था।
गनी मोहम्मद राजस्थान के लोक संगीत ‘मांड’ के एक प्रसिद्ध लोक गायक हैं। वह अपने भाई अली मोहम्मद के साथ गाते हैं और उनकी मधुर संगीत यात्रा लगभग 40 वर्ष से अनवरत चल रही है।
गनी मोहम्मद जन्म का 17 अप्रैल, 1955 को राजस्थान के बीकानेर जिले के एक गांव में हुआ। उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा अपने पिता उस्ताद सिराजुद्दीन खान से ग्रहण की। मांड विशेष रूप से बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर और बाड़मेर में एक बहुत ही लोकप्रिय लोक गायन शैली है। उन्होंने अपने भाई के साथ न केवल इस लोक गायन शैली को पुनर्जीवित किया, बल्कि नई पीढ़ी को सिखाकर इसे बढ़ावा भी दिया। गनी मोहम्मद ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों तथा रेडियो और टेलीविजन पर प्रस्तुति दी है। अब, वह और उनके भाई लोक गायन में मांड शैली के पर्याय बन गए हैं। उनके मांड गायन के कई संगीत एल्बम बाजार में उपलब्ध हैं। "केसरिया बालम”, "सुपनो", "मूमाल" और "कुइजन" राजस्थानी लोक गीत में उनके कुछ सबसे लोकप्रिय एल्बम हैं।
गनी मोहम्मद और उनके भाई विभिन्न टी.वी. शो में निर्णायक के रूप मे भाग लिया है। उन्होंने भारतीय सिनेमा में संगीत निर्देशन किया है। अधिकांश आधुनिक फिल्मी गायकों ने उनके संगीत निर्देशन में गाया है। उन्होंने कई संगीत एल्बम जारी किए हैं जिनमें लता मंगेशकर, आशा भोसले, उदित नारायण, अलका याग्निक, ऋचा शर्मा, सुरेश वाडेकर, अनूप जलोटा, पंकज उधास, हंस राज हंस, अनुराधा पौडवाल, साधना सरगम जैसे गायकों ने गाया है। उनके गाए गीतों, भजनों, गजलों की संगीत जगत की महान हस्तियों ने मुक्त कंठ से सराहना की है। आज, वे दुनिया भर में अपने गायन का प्रदर्शन करते हैं और उनकी प्रत्येक प्रस्तुति में राजस्थानी लोक संगीत 'मांड' और रेत की खुशबू होती है।
गनी मोहम्मद को संगीत के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए राजस्थान सरकार द्वारा वर्ष 2022 में राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्हें 2019-20 में अल्लाहजिला बाई पुरस्कार और 2022-23 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्हें 2018 में बीकानेर (राजस्थान) जिला प्रशासन द्वारा भी सम्मानित किया गया था।