Saturday, 29 August 2026

जैन आचार्य सुनील सागर ने अपने संघ के साथ ढाई दिन के झोपडे़ का किया अवलोकन, कहां संस्कृत महाविद्यालय और किसी जमाने में जैन मंदिर भी रहा होगा


जैन आचार्य सुनील सागर ने अपने संघ के साथ ढाई दिन के झोपडे़ का किया अवलोकन, कहां संस्कृत महाविद्यालय और किसी जमाने में जैन मंदिर भी रहा होगा

जैन आचार्य सुनील सागर ने कहा कि 'ढाई दिन का झोपड़ा' के बारे में इतिहास में पढ़ा करते थे। वहां संस्कृत महाविद्यालय भी था और किसी जमाने में जैन मंदिर भी रहा होगा।

आचार्य ने अपने संघ के साथ ढाई दिन के झोपडे़ का अवलोकन करने के बाद ये बात कही। इस दौरान जैन धर्मावलम्बियों के अलावा हिन्दूवादी संगठनों के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भी मौजूद थे।

आचार्य छोटे धडे़ की नसियां से देहली गेट होते हुए धानमंडी, दरगाह बाजार, त्रिपोलिया गेट से होते हुए मुनि संघ ढाई दिन के झोपडे़ पर पहुंचे। अंदर भ्रमण करने लगे तो उन्हें नग्न अवस्था में देखकर रोका गया। इसके बाद धार्मिक मान्यता के बारे में बताया तो वे मान गए। इसके बाद वहां ढाई दिन के झोपडे़ को देखा।

जैन आचार्य सुनील सागर ने कहा कि भारतीय संस्कृति मेल मिलाप की संस्कृति है और भगवान राम व महावीर ने अंहिसा का संदेश दिया। मैत्रीभाव रखना चाहिए। एक-दूसरे के प्रति आदर भाव रखना चाहिए। जैन आचार्य सुनील सागर ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इतिहास में पढ़ा करते थे ढाई दिन का झोपड़ा। वहां संस्कृत महाविद्यालय भी था और किसी जमाने में वहां मंदिर भी रहा।

जैन आचार्य सुनील सागर ने कहा किपार्श्वनाथ मंदिर गुफा वाले मंदिर में गए तो सौ से ज्यादा मूर्तियां रखी हुई थी तो पूछा और बताया कि ढाई दिन के झोपडे़ में खुदाई के समय निकाली और बुजुर्ग लाए तो रख दी। इसका मतलब वहां कभी जैन मंदिर भी रहा होगा। आपसी समझदारी से इन मसलों का हल निकालना चाहिए। जहां मस्जिद है, वे रहे लेकिन जहां मंदिर वगैरह डिस्टर्ब किए गए, वे प्राचीन स्वरूप में आने चाहिए।

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