


प्रदेश में फर्जी तरीके से ऑर्गन ट्रांसप्लांट के लिए एनओसी जारी करने के मामले में सोमवार को सवाई मानसिंह (एसएमएस) मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव बगरहट्टा, एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के चेयरमैन डॉ. सुधीर भंडारी ने इस्तीफा दे दिया जिसे राज्य सरकार स्तर पर मंजूर कर लिए गए।
राज्य सरकार द्वारा मेडिकल शिक्षा विभाग के आयुक्त इकबाल की जांच रिपोर्ट में इन तीनों वरिष्ठ डॉक्टरों भूमिका को संदिग्ध माना गया था। इसके आधार पर सरकार नेएसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. राजीव बगरहट्टा, एसएमएस अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अचल शर्मा और स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन (सोटो) के चेयरमैन डॉ. सुधीर भंडारी से इस्तीफे मांगे थे। उच्च स्तरीय दबाव के चलते इन तीनों वरिष्ठ डॉक्टरों ने अपना इस्तीफा सरकार को भेज दिया जिसे मंजूर कर लिया । अब एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और एसएमएस अस्पताल अधीक्षक पद नियुक्ति वरिष्ठ के आधार पर मंगलवार कोअस्थाई तौर पर की जा सकती है। इसका निर्णय भी मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के स्तर पर किया जाना है। वे लोकसभा चुनाव को लेकर तेलंगाना के दौरे पर हैं आने के बाद इसका निर्णय होगा।
अप्रैल में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने रिश्वत लेकर ऑर्गन ट्रांसप्लांट की एनओसी देने के मामले में एसएमएस अस्पताल के सहायक प्रशासनिक अधिकारी के अलावा प्राइवेट हॉस्पिटल फोर्टिस और ईएचसीसी के एक-एक अधिकारी को पकड़ा था। इसके बाद एसएमएस अस्पताल प्रशासन ने सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह को निलंबितकर दिया था। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अतिरिक्त मुख्य सचिव शुभ्रा सिंह ने इस मामले में ईएचसीसी, फोर्टिस एस्कोर्ट और मणिपाल अस्पताल के ऑर्गन ट्रांसप्लांट करने के लाइसेंस को रद्द कर दिया।
सितंबर माह में हुए ऑर्गन ट्रांसप्लांट कॉर्डिनेटर के प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाण पत्र पर डॉ सुधीर भंडारी ने बतौर सोट्टो चेयरमैन सिग्नेचर किए थे. फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने उन्हें चेयरमैन पद से हटा दिया है। अब आरयूएचएस के वाइस चांसलर पद से हटाने के लिए राज्यपाल को रिपोर्ट भेजी जाएगी। उधर इस मसले में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि हमने डॉ सुधीर भंडारी को इस्तीफा देने के लिए कहा है. अगर वो इस्तीफा नहीं देंगे तो हम जांच करेंगे।
अब राज्य सरकार इस प्रकरण की जांच रिपोर्ट राज्यपाल कलराज मिश्र को भेज सकती है, ताकि रिपोर्ट के आधार पर आरयूएचएस के कुलपति डॉ. सुधीर भंडारी को पद से हटाया जा सके। डॉ.भंडारी की नियुक्ति तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के शासनकाल में हुई थी। डॉ. भंडारी एसएमएस मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं।
मेरी कोई गलती नहीं,आर यू एच एस के कुलपति पद से इस्तीफा देने का कोई सवाल नहीं है: डॉ. भंडारी
वहीं दूसरी और आरयूएचएस के कुलपति डॉ. सुधीर भंडारी ने कुलपति पद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मेरी इसमें कोई गलती नहीं है।उन्होंने कहा कि मैंने सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य पद का कार्यकाल 4 जुलाई 2022 के बाद खत्म हो गया था। इससे पहलेसवाई मानसिंह अस्पताल के संयोजक और अधीक्षक की ओर से अस्पताल में हर सप्ताह पेशेंट ऑथराइजेशनकी बैठक होती थीऔर मेरा इसमें कोई दोष नहीं है।