


हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता की एफडी पूरी होने के बाद भी भुगतान नहीं करने को गंभीर मानते हुए आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार को सोसायटी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए याचिकाकर्ता को राशि का पूर्ण भुगतान ब्याज के साथ करने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता नेहा त्यागी ने आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के खिलाफ याचिका दायर करते हुए कहा था कि उसने साल 2017 में 2.30 लाख की फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम में दो एफडी करवाई थी। लेकिन मैच्योरिटी अवधि पूर्ण होने पर भी सोयायटी की ओर से भुगतान नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता हितेष बागड़ी ने बताया कि एफडी 2019 में परिपक्व हो गई थी। उसके बाद से लगातार याचिकाकर्ता अपने भुगतान के लिए सोसायटी को कह रही हैं। लेकिन सोसायटी उसे भुगतान नहीं कर रही है।
उन्होंने बताया कि मैच्योरिटी अवधि पूरी होने पर प्रार्थी ने सोसायटी के कार्यालय पर संपर्क किया तो मात्र उसे मौखिक आश्वासन दिए गए। परेशान होकर प्रार्थी ने राजस्थान उच्च न्यायालय में एक रिट याचिका लगाई।
आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसायटी के प्रबंधकों ने एफडी कराते समय नियमों के तहत सोसायटी ने आश्वस्त किया था कि मैच्योरिटी अवधि पूर्ण होने पर उसकी मूल रकम मय ब्याज अदा की जाएगी। एफडी की परिपक्वता अवधि पूर्ण हो चुकी है। परंतु प्रार्थी की ओर कई बार निवेदन करने के पश्चात भी उसे उसकी राशि का भुगतान नहीं किया गया। बिना किसी उचित कारण के पीड़िता की राशि को रोका गया है। जो गलत है।
हाई कोर्ट ने मामले का अंतिम निस्तारण करते हुए, सहकारिता विभाग के रजिस्ट्रार सहकारिता को निर्देश दिए कि आदर्श क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के विरुद्ध सख्त कार्यवाही की जाए, तथा प्रार्थी की राशि का पूर्ण भुगतान मय ब्याज किया जाए।