


बाबा श्याम का मुख्य मेला बुधवार को एकादशी पर भरा। लखदातार के दर्शन के लिए इस दौरान देश- विदेश से करीब सात लाख श्रद्धालु खाटू पहुंचे।
बाबा श्याम के जयकारों के साथ पैदल और पेट पलायन तो कोई भावों से झूमता हुआ बाबा के दर पहुंचा। प्रेमी भक्तों को दर्शन देने बाबा श्याम खुद भी नीले घोड़े पर सवार होकर मंदिर से बाहर निकले। सोने के मुकुट व रत्न जडि़त हल्के बैंगनी बाने में सलोने श्याम ने जब सज-धज कर दहलीज लांघी तो भाव से भरे भक्त अपनी सुध- बुध भूल गए। उड़ते रंग- गुलाल व बरसते फूलों के बीच बाबा श्याम की एक झलक पाने व उनके रथ को छूने के लिए उनमें होड़ सी मच गई। रथ में मोहनदास महाराज और सेवक परिवार के लोग बैठे थे। यात्रा ने करीब 1 घंटे तक भ्रमण किया। रथयात्रा शनि मंदिर होते हुए हॉस्पिटल चौराहे पर पहुंची है। इसके चारों तरफ भक्तों की भीड़ है और बाबा के जयकारे लगा रहे हैं। इस दौरान मंदिर में भी बाबा श्याम का कलकत्ता के रंगीन फूलों व ड्राई फ्रूट से विशेष श्रृंगार किया गया। जो देखते ही श्रद्धालुओं का मन मोह रहा था। मेले का समापन गुरुवार को सूरजगढ़ के निशान के साथ होगा।
पुलिस को करना पड़ा हल्का बल प्रयोग
रथयात्रा शुरू होने के बाद मंदिर के सामने और हॉस्पिटल चौराहा के पास शोभायात्रा के दौरान मंदिर व मेला मजिस्ट्रेट कार्यालय के पास बाबा श्याम के दर्शनों के लिए उमड़ी भीड़ बेकाबू सी हो गई। जिस पर काबू पाने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा। हॉस्पिटल चौराहे के पास 2 महिलाएं रथ के पास गिर गईं, उन्हें उठाया गया। नहीं तो कोई हादसा हो सकता था।लेकिन पुलिस प्रशासन ने समय रहते हुए उसकी काबू में कर लिया।
श्रद्धालुओं से अटे गलियां, छत व छज्जे
श्याम बाबा की शोभायात्रा देखने आए श्रद्धालुओं की भीड़ से खाटू के हर गली व रास्ते भर गए। शोभायात्रा के मार्ग की तो हर दहलीज, चबूतरे, छत और छज्जे तक श्रद्धालुओं से पट गए। जो जहां था वहीं से श्याम बाबा के जयकारे लगाता हुआ अपने भाव भगवान तक पहुंचाता रहा।
नुकीली कीलों पर लेटकर तो कोई निशान लेकर पहुंचा
मेले में श्रद्धालुओं की श्रद्धा के कई रंग दिखे। पैदल व पेट पलायन तो कोई भावों से झूमते हुए खाटूश्यामजी पहुंचा। एक श्रद्धालु तो नुकीली कीलों पर दंडवत करता हुआ खाटूधाम पहुंचा। निशान लेकर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी खासी रही।