


भाजपा ने चूरू से लोकसभा के घोषित उम्मीदवार देवेंद्र सिंह झाझरिया वन विभाग में सहायक वन संरक्षक और उदयपुर से लोकसभा के घोषित उम्मीदवार मन्नालाल रावत परिवहन विभाग में अतिरिक्त आयुक्त पद पर कार्यरत थे। दोनों वर्तमान में जयपुर में ही कार्यरत रहे हैं।
भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने बिना स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति वीआरएस स्वीकृति के ही उम्मीदवार घोषित करने के मामले को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति उठाते हुए चुनाव आयोग को शिकायत की है। वीआरएस स्वीकृति मिलने से पहले दोनों सरकारी अधिकारियों ने राजनीतिक तौर पर बयानबाजी कर सरकारी नियमों का उल्लंघन किया है। 2 मार्च को भाजपा ने दोनों उम्मीदवारों की घोषणा कर दी थी जबकि दोनों उम्मीदवारों को वीआरएस स्वीकृति 4 मार्च को स्वीकृत किया गया है।
राजस्थान के लोकसभा इलेक्शन वॉर रूम के प्रदेशाध्यक्ष जसवंत सिंह गुर्जर ने चुनाव आयोग को ज्ञापन भेजकर भाजपा के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। गुर्जर ने इस बारे में एक पोस्ट भी किया है।झाझड़िया और रावत दोनों का नाम जब 2 मार्च को भाजपा ने अपने उम्मीदवारों के रूप में घोषित किया तब तक दोनों के पास वीआरएस की स्वीकृति नहीं थी।यह भी स्पष्ट नहीं है कि दोनों ने वीआरएस के लिए आवेदन किया भी है या नहीं।
कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत में स्पष्ट लिखा है कि राजस्थान सरकार के सेवा नियमों का उल्लंघन है। इसके तहत कोई भी सरकारी अधिकारी-कर्मचारी न केवल चुनाव नहीं लड़ सकता है, बल्कि वो किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकता है।टिकट की घोषणा के बाद दोनों की ओर से भाजपा नेतृत्व का आभार जताना और मीडिया में इंटरव्यू देना सरकारी नियमों का उल्लंघन है। चुनाव आयोग को भाजपा और संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई करनी ही चाहिए।