


राजस्थान की भाजपा सरकार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत पहले ईआरसीपी जल समझौते की बात कर प्रदेश की जनता को गुमराह कर रहे थे और अब 17 फरवरी को शेखावाटी में यमुना के पानी को लाने के लिए हरियाणा की सरकार से कोई एमओयू साईन किया जिसको लेकर आभार यात्रायें कर रहे हैं तथा भागीरथ मुख्यमंत्री आये हैं, इस प्रकार के होर्डिंग्स लगाकर भाजपा द्वारा प्रचार किया जा रहा है।
गुरुवार को कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि यमुना जल समझौता 1994 में किया गया था और अपर यमुना जल बोर्ड में पॉंच राज्य आते हैं, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान। इसमें यह फैसला हुआ था कि शेखावाटी को 1917 क्यूसेक पानी मिलेगा। एक समझौता 2001-2002 में भी हुआ जिसमें हरियाणा से यह तय हुआ कि किस स्थान से पानी मिलेगा। उस समय हरियाणा का दावा 13 हजार क्यूसेक पर था, उसके अतिरिक्त पानी लेने के लिए आधारभूत ढॉंचा तैयार किया जाना था, किन्तु हरियाणा ने उसकी एनओसी राजस्थान को नहीं दी।
उन्होंने कहा कि हरियाणा ने बाद में अपनी डिमाण्ड बढ़ाकर 18 हजार कर ली और अभी जो कथित् समझौता होना बताया जा रहा है उसमें राजस्थान की भाजपा सरकार ने हरियाणा के समक्ष आत्म समर्पण कर दिया और समझौते पर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर कह रहे हैं कि 24 हजार क्यूसेक पानी पहले हरियाणा लेगा उसके पश्चात् बरसात के दिनों में 15-20 दिन अगर कोई अतिरिक्त पानी हुआ तो राजस्थान को देंगे, किन्तु उस अतिरिक्त पानी में से भी 25 प्रतिशत पानी पहले हरियाणा लेगा।
उन्होंने कहा कि अब हरियाणा सरकार राजस्थान की भाजपा सरकार ने क्या समझौता किया है, कितने पानी का समझौता किया है, उसका खुलासा भी राजस्थान की भाजपा सरकार ने नहीं किया। जबकि वास्तविकता यह है कि पानी का समझौता तो वर्तमान राजस्थान सरकार को करने का अधिकार ही नहीं है, क्योंकि किसे कितना पानी मिलेगा, यह समझौता पूर्व में हो चुका है, वर्तमान में तो केवल पानी लाने के लिए पाईप लाईन बिछाने का एमओयू ही होना था।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि केवल आधारभूत ढॉंचे के निर्माण की इजाजत देने के नाम पर हरियाणा सरकार ने 13 हजार से बढ़ाकर 24 हजार क्यूसेक पानी लेने के लिए राजस्थान की भाजपा सरकार से तय कर लिया, जिसमें यह भी तय कर लिया कि 15-20 दिन की बरसात के पश्चात् अतिरिक्त पानी में से 25 प्रतिशत हरियाणा के लेने के बाद कोई पानी बचा तो ही राजस्थान को दिया जायेगा।
उन्होंने कहा कि हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर द्वारा विधानसभा में दिए वक्तव्य के अनुसार राजस्थान की भाजपा सरकार ने प्रदेश की जनता के हितों से खिलवाड़ किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री शर्मा केवल भ्रमण करने का कार्य कर रहे हैं तथा आरएसएस के मुख्य एजेण्डे के अनुसरण में प्रदेश की जनता को भ्रमित करने का कार्य कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार का समझौता कथित् रूप से किया गया है उसमें राजस्थान को एक लीटर पानी भी मिलना सम्भव दिखाई नहीं दे रहा है, किन्तु राजस्थान के भ्रमणशील मुख्यमंत्री एवं केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, राजीविका के कार्यकर्ताओं व सरकारी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को निर्देश देकर खुद का स्वागत करवा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज राजस्थान की भाजपा सरकार ने हरियाणा की सरकार के सामने घुटने टेेक दिये, केवल इसलिये कि पाईप लाईन बिछाना की अनुमति मिलेगी अथवा नहीं। उन्होंने कहा कि राजस्थान में भाजपा की डबल इंजन की सरकार के प्रदेशवासियों के हितों के साथ कुठाराघात किया है तथा जनता को धोखा दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार केवल और केवल प्रदेशवासियों को भ्रमित कर आगामी लोकसभा चुनावों में वोटों का फायदा लेना चाहती है जिसमें भाजपा कामयाब नहीं होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग है कि मुख्यमंत्री जो भी समझौता ईआरसीपी योजना तथा 17 फरवरी को यमुना के जल हेतु हरियाणा सरकार से किया है उसे सार्वजनिक करें और जनता को सच्चाई से अवगत करवायें।
उन्होंने कहा कि राजस्थान की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने कुम्भाराम लिफ्ट कैनाल प्रोजेक्ट को लेकर पूरी डीपीआर तैयार कर ली थी और इस पर कार्य भी चालू हो गया था किन्तु आज नीमकाथाना में स्थानीय विधायक सुरेश मोदी के नेतृत्व में स्थानीय जनता धरने पर बैठी है और मांग कर रही है कि जब इस परियोजना के कार्य के लिए सभी प्रकार की सेंशन निकल चुकी है तो कार्य प्रारम्भ क्यों नहीं हो रहा है। जबकि मुख्यमंत्री शर्मा आभार यात्रायें निकालकर स्वागत करा रहे हैं।